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UP: कैश लूट का पर्दाफाश...छह शातिर लुटेरे गिरफ्तार, एक करोड़ से अधिक नकदी बरामद; कई जिलों के अपराधी दबोचे

Sat, 04 Oct 2025 10:56 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

कैश प्रबंधन का काम करने वाली गुजरात की जीके कंपनी की एक गाड़ी कानपुर से आगरा जा रही थी, जिसमें करीब दो करोड़ का बैलेंस कैश भरा हुआ था। लुटेरों ने चालक को बंधक बनाकर कैश लूट लिया था।
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गैंग का खुलासा करते पुलिस अधिकारी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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फिरोजाबाद के मक्खनपुर क्षेत्र में गुजरात की जीके कंपनी के ड्राइवर से 30 सितंबर को हुई दो करोड़ रुपये की सनसनीखेज कैश लूट का शनिवार रात पुलिस ने खुलासा कर दिया। अंतर्राज्यीय गैंग के 6 लुटेरों को गिरफ्तार किया है, जिनके कब्जे से लूटी गई रकम में से 1 करोड़ 05 हजार 310 रुपये की नगदी बरामद हुई है। लूट की रकम से खरीदा गया सामान भी बरामद हुआ है। गिरफ्तार लुटेरे दिल्ली, हरियाणा, अलीगढ़ और आगरा के अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्य हैं। खुलासा करने वाली टीम को एसएसपी स्तर से 75 हजार रुपये का इनाम दिया गया है।
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पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता करते हुए एसएसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि यह वारदात 30 सितंबर की सुबह करीब 5 बजे थाना मक्खनपुर क्षेत्र के ग्राम घुनपई के पास हुई थी। कैश प्रबंधन का काम करने वाली गुजरात की जीके कंपनी की एक गाड़ी कानपुर से आगरा जा रही थी, जिसमें करीब दो करोड़ का बैलेंस कैश भरा हुआ था। लुटेरों ने गाड़ी को रोककर चालक दानजी पटेल के सिर पर असलहे की बट से सिर पर प्रहार किया और उसके हाथ-पैर बांधकर उसे एक कार में डालकर ले गए थे। 

 

आगरा-नोएडा एक्सप्रेस-वे पर ले जाने के बाद उसे छोड़कर फरार हो गए थे। पुलिस की छह टीमों ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी सर्विलांस की मदद ली। कठफोरी टोल और इटावा के एक ढाबे पर संदिग्ध वाहनों की पहचान की गई। शनिवार रात पुलिस ने सभी 6 शातिर लुटेरों को पायनियर पुल के पास से धर दबोचा। 

गिरफ्तार लुटेरों के कब्जे से न सिर्फ लूट की बड़ी रकम बरामद हुई, बल्कि उनके द्वारा लूटे गए पैसों से खरीदे आईफोन (कीमत 55 हजार), एक नई मोटरसाइकिल की रसीद (कीमत 1 लाख) भी बरामद हुआ। इसके अलावा एक एक तमंचा और तीन कारतूस भी बरामद किए हैं।

इनकी हुई गिरफ्तारी और रकम बरामदगी
- नरेश पुत्र राकेश कुमार उर्फ भूरी निवासी गांव अरनी, खैर अलीगढ़ के पास से 25 लाख दो हजार पचास रुपये बरामद हुए।
- तुषार पुत्र राजकुमार निवासी मोहल्ला शिवपुरी निवाड़ी रोड मोदीनगर, गाजियाबाद से 20 लाख एक हजार दो सौ रुपये व एक तमंचा बरामद हुआ।
- दुष्यंत पुत्र मोहन सिंह निवासी ओम नगर, खैर, अलीगढ़ के पास से 20 लाख 850 रुपये और 55 हजार रुपये कीमत का नया आईफोन।
- अक्षय पुत्र जयप्रकाश निवासी गाजीपुर पूर्वी दिल्ली के पास से 13 लाख 300 रुपये।
- आशीष उर्फ आशू पुत्र प्रमोद निवासी बहादुरगढ़, हरियाणा के पास से 10 लाख 450 रुपये व लूट के पैसों से खरीदी एक नई मोटर साइकिल की रसीद (कीमत एक लाख रुपये)।
- मोनू उर्फ मिलाप पुत्र इंद्रपाल सिंह निवासी गढबढ जैतपुर, आगरा के पास से 12 लाख 460 रुपये।

 

एक साल से कर रहे थे रेकी, गैंग लीडर है अलीगढ़ के खैर का नरेश
गिरफ्तार अभियुक्तों में मुख्य आरोपी गैंग लीडर नरेश बड़ा अपराधी है, उसके खिलाफ दिल्ली, फरीदाबाद और गाजियाबाद में लूट, डकैती, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट सहित 7 मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने खुलासा किया कि नरेश 2012-13 में गुजरात की एक हवाला कारोबार करने वाली कंपनी के साथ जुड़ा है। वहां से उसको इस प्रकार के कामकाज की जानकारी हुई। इसके बाद इसने कानपुर देहात में 1.25 करोड़ और फिरोजाबाद के टूंडला में 25 लाख रुपये की लूट की थी, जो कि हवाला के जरिये ले जाई जा रही रकम थी। उन दोनों मामलों में केस दर्ज नहीं हुआ। इसके चलते इसके हौसले बुलंद हो गए थे।

एक साल से की जा रही थी रेकी, जेल में बना गैंग
गैंग लीडर नरेश इस वारदात को अंजाम देने के लिए एक साल से प्लान कर रहा था। उसने कई बार रकम के आने-जाने की रेकी की थी। इसी रेकी के बाद उसने गाजियाबाद जेल में बंद रहने के दौरान मिले तुषार और दुष्यंत से संपर्क किया। तुषार और दुष्यंत ने अपने नजदीकी अन्य अपराधियों को इस वारदात के लिए तैयार किया। इसके बाद इन्होंने वारदात को अंजाम दिया।

दिल्ली से किराए पर ली थीं दो कार, असली फोटो के साथ जाली दस्तावेज इस्तेमाल
नरेश और उसके गैंग के अन्य सदस्यों ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए दिल्ली से दो कार किराए पर लीं थीं। इनको किराए पर लेते वक्त इन्होंने आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस तो फर्जी बनवा लिए। मगर, उनमें अपने असली फोटो का इस्तेमाल किया। यही गैंग के खिलाफ पुलिस को सबसे बड़ी लीड मिली और पहले पुलिस किराए पर गाड़ी देने वाले के पास पहुंची, वहां से पुलिस को फोटो मिले और इन अपराधियों को तलाश लिया गया।

फास्टैग नहीं, टूंडला टोल पर कैश भुगतान किया
इस गैंग ने अपराध के बाद बेहद शातिराना अंदाज में पुलिस से बचाने का इंतजाम किया। अव्वल तो इन्होंने वारदात के तुरंत बाद ही अपने मोबाइल और सिम कार्ड तोड़ दिए, ताकि सर्विलांस सेल इनकी लोकेशन न निकाल सके। इसके बाद गैंग ने जब इटावा से जीके कंपनी की गाड़ी का पीछा शुरू किया तो रास्ते में पड़़ने वाले किसी भी टोल पर फास्टैग का इस्तेमाल नहीं किया। सभी टोल पर नगद भुगतान किया। यह भी पुलिस के लिए संदेह की स्थिति रही, जिसके आधार पर पहले गाड़ी और फिर अपराधी रडार पर आए। इसके अलावा गैंग ने अपनी दोनों गाड़ियों को जीके कंपनी की गाड़ी के आगे-पीछे ही रखा, जिसके कारण यह पुलिस की रडार पर आ गए।

दो करोड़ की रकम के साथ चार दिन सड़कों पर बिताए
गैंग लीडर नरेश और उसके सभी साथी दो करोड़ रुपये की रकम लूटने के बाद किसी भी होटल, गेस्ट हाउस में जाकर नहीं छिपे। उन्होंने गाड़ियों में ही रात काटी। इसके अलावा कैश का बंटवारा भी तुरंत कर लिया और गैंग के सभी सदस्य अलग-अलग हो गए।

 
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फरार लुटेरों की तलाश में जुटी पुलिस
इस वारदात में तीन से अधिक और लुटेरे शामिल थे, जो पुलिस के हाथ नहीं लगे हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। हालांकि उनके नामों का पुलिस ने खुलासा नहीं किया है। बताया जा रहा है कि बाकी की रकम उनके ही पास है।

अय्याशी और महंगे शौक पूरे करने के लिए बने अपराधी, दो ग्रेजुएट
गैंग के सभी सदस्यों की उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच है। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि इनमें से सिर्फ दुष्यंत और तुषार ही ग्रेजुएट हैं। बाकी अन्य कम पढ़े लिखे हैं। मगर, इनको कम उम्र में पैसा कमाने, महंगे शौक पूरा करने, अय्याशी करने का लालच लग गया। इसके चलते यह लोग कर्ज में भी डूबने लगे। इसके बाद यह अपराधी की दुनिया में उतर आए और लूट-चोरी, नशीले पदार्थों की तस्करी का काम करने लगे। दो करोड़ की लूट के बाद उन्होंने अपना कर्ज भी चुकाया। बाइक बहादुरगढ़ से खरीदी गई।

दुष्यंत और नरेश की अलीगढ़ के एक पुराने अपराधी के पुत्र से है नजदीकी
दुष्यतं और नरेश की नजदीकी अलीगढ़ के एक पुराने अपराधी के पुत्र के साथ है। उस परिवार की एक महिला ने चुनाव भी लड़ा था। उस वक्त दुष्यंत चुनाव प्रचार में घूमा करता था। नरेश और दुष्यंत, दोनों ही खैर, अलीगढ़ के रहने वाले हैं, इसके चलते इनके संबंध आपस में गहरे हैं।

रकम हवाला की होने की संदिग्धता, जीके कंपनी की मुश्किलें बढ़ीं
दो करोड़ की लूट की रकम के संबंध में गुजरात की जीके कंपनी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दरअसल, यह रकम हवाला कारोबार से जुड़ी होना बताया जा रहा है। पुलिस के सवालों के जवाब भी कंपनी के प्रतिनिधि ठीक से नहीं दे पाए हैं। कंपनी किस प्रोडक्ट का काम करती है, यह भी ठीक से नहीं बताया गया है। पुलिस ने इस मामले में कहा है कि वह रकम के संबंध में जीएसटी टीम से जांच कराएगी, ताकि रकम संबंधी पूरी सच्चाई सामने आ सके।

खुलासे के बाद एसएसपी ने थपथपाई तेजतर्रार टीम की पीठ
गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में इंस्पेक्टर शिकोहाबाद अनुज राणा, रामगढ़ इंस्पेक्टर संजीव दुबे, प्रभारी एसओजी/सर्विलांस अमित तोमर और थानाध्यक्ष मक्खनपुर चमन शर्मा शामिल रहे। एसएसपी सौरभ दीक्षित ने इनकी पीठ थपथपाई। दरअसल, इंस्पेक्टर अनुज राणा और संजीव दुबे को आगरा जोन के तेजतर्रार इंस्पेक्टरों में गिना जाता है।

 
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