फिरोजाबाद। अप्रैल-मई में कोरोना संक्रमण एवं लॉकडाउन की बंदिशों के कारण छाई मंदी से ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों अभी उबरे नहीं हैं। बाजारों में कलात्मक, समूहों द्वारा निर्मित परिधान, एवं अन्य उत्पादों की डिमांड की कमी है। ऐसे में समूहों से जुड़ी करीब 30 हजार महिलाओं की आजीविका पर विपरीत प्रभाव है।
ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिला कामगारों को आर्थिक व व्यवसायिक रूप से मजबूत करने के लिए जिला में विगत वर्षों में हुई कवायद फिलहाल सुस्त है। लंबी पहल के बाद ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों के गठन के साथ ही उन्हें सादा चूड़ी पर मोती की पच्चीकारी, स्कूल ड्रेस मेकिंग व अन्य परिधान, बांस व सूतली आदि से टोकरी बनाने जैसे कार्यों से जोड़ते हुए आजीविका के साधन सुलभ कराए गए लेकिन कोरोना संक्रमण ने ग्रामीण अंचलों में संचालित स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की मांग प्रभावित है। तीन हजार स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार से डिमांड नहीं है। इसका असर समूहों से जुड़ी करीब 30 हजार महिलाओं की आजीविका पर पड़ा है। हस्तशिल्प में कुशल महिलाएं अब मनरेगा एवं अन्य निर्माण इकाईयों अथवा घरेलु कार्यों में अपनी आजीविका तलाश रहीं हैं।
अन्य कार्यों से जुड़ रहीं महिला कामगार
समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की डिमांड कम होने से महिलाओं की कमाई भी प्रभावित है। इसी कारण समूह से जुड़ीं महिलाएं का रुख मनरेगा कार्यों, बैंक सखी, डिजीटल इंडिया के अलावा स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं की है।
कोरोना से पूर्व इन उत्पादों की खासी डिमांड
कांच चूड़ी पर मोती की पच्चीकारी, दाल-साग मसाला, अचार आलू चिप्स आदि उत्पादों की बाजार में खासी डिमांड रही है। डूडा एवं एनआरएलएम आदि विभाग के अनुसार उक्त समूहों की महिलाओं की मासिक आय औसतन पांच से सात हजार रुपये है।
समूह से जुड़ीं कामगारों की बात
स्कूल ड्रेस मेकिंग से समूह से जुड़ी महिलाओं की आजीविका में काफी सुधार हुआ, लेकिन कोरोना ने हमारे समूह के उत्पादों की डिमांड घट गई है।
डॉली आरती समूह
समूह से जुड़ी महिलाएं निर्बल आय वर्ग की हैं। डिमांड कम होने से महिलाएं अन्य कार्यों से भी जुड़ रहीं हैं हालांकि सरकारी योजनाओं के जरिये महिलाओं को रोजगार के साधन सुलभ हो रहे हैं।
हेमलता गायत्री, मां स्वयं सहायता समूह
समूहों द्वारा बनाए उत्पादों की डिमांड बढ़ाने के लिए कार्ययोजना तैयार की है। मेला प्रदर्शनी के अलावा अन्य माध्यमों से उत्पादों की बिक्री बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
राजेश कुरील, डीसी, एनआरएलएम