विधायकों की जवाबदेही तय करने के लिए कामन सोसइटी बननी चाहिए। यह सोसइटी विधायकों से समय-समय पर उनके कार्यों के बारे में पूछ सके। ऐसी सोसइटी जो आम आदमी की समस्याओं को विधायकों को बताए और निस्तारण कराए। यह सोसाइटी पूरी तरह से गैर राजनीतिक हो, शहर की सभी संस्थाओं और वर्ग के लोगों का इसमें प्रतिनिधित्व हो। अमर उजाला द्वारा आयोजित फोकस ग्रुप में शहर की समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने कुछ इसी तरह से सुझाव दिए।
सड़क खोदने की समायोजित नीति बने
विकास की उम्मीद सत्ता पक्ष के विधायक से की जा सकती है। हालांकि सत्ता में नहीं होने पर भी विधायक की जिम्मेदारी कम नहीं है। बुनियादी समस्याओं को वह हल करा सकता है। शहर में सभी संस्थाएं मिलजुल कर एक कामन संस्था बनाए, जो समय-समय पर विधायक से कार्य का ब्योरा ले। शहर की बड़ी समस्याओं के निदान के लिए विधायक पर सामूहिक दबाव बनाया जाए। एक विभाग सड़क बनाता है तो दूसरा कुछ दिन बाद तोड़ देता है। विधायक विभागों के बीच तालमेल करा तय कराए एक बार में किस-किस विभाग को सड़क पर काम करना करना है उसके बाद कम से कम एक साल से पहले सड़क खोदनी नहीं चाहिए।
मनीष गुप्ता अलंकार (पूर्व गर्वनर माथुर वैश्य इंटरनेशनल क्लब)
वोट बैंक देख कर खपाई जाती है विधायक निधि
फीरोजाबाद ताज संरक्षित जोन में 24 घंटे के स्थान पर 12-13 घंटे ही बिजली क्यों दी जा रही है। इस मुद्दे पर विधायक मौन हो जाते हैं। सर्विस रोड के खस्ताहाल पर किसी विधायक का ध्यान नहीं है। विधायक निधि वोट बैंक को देख कर खपाई जाती है आम जनता की समस्याओं पर फोकस नहीं रहता है।
आलिंद अग्रवाल - (र्स्वाश्रम जिर्णोद्वार समिति के संस्थापक)
समाजसेवी संस्थाओं के साथ बैठ कर तय करें विकास का खाका
मीडिया पहल करे कि जीतने के बाद विधायक शहर की समाजसेवी संस्थाओं के साथ एक जगह बैठें और जिले के विकास का खाका तय करें। जो काम सबसे जरूरी हैं उन्हें प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। प्रत्याशी वोट मांगने बिना सुरक्षा के जाते हैं जीतने के बाद विधायकों को सुरक्षा की क्या जरूरत पड जाती है। करोड़ों रुपया विधायकों की सुरक्षा पर खर्च होता उसे जनता की समस्याओं पर खर्च किया जाना चाहिए।
धुव्रकुमार आचार्य - (अध्यक्ष माथुर वैश्य इंटरनेशनल क्लब)
टैक्स के मनमाने बोझ से दिलाएं मुक्ति
शहर के लोग रात-रात भर जाग कर पानी भरते हैं। क्या कारण है कोई भी विधायक अब तक इस समस्या का स्थाई हल नहीं कर पाया है। सुरक्षा के मोर्चे पर अब तक कोई भी मजबूत काम नहीं हुआ है। सरकारी शिक्षण संस्थाओं को सुधारा जाए। नगर निगम बनने के बाद जनता को सुविधा कोई नहीं मिली टैक्स मार जरूर पडी है।
मनोज गर्ग (मैनेजेंग डायरेक्टर पंडित मुरारी लाल इंटर कालेज)
समस्याएं छोटी-छोटी पर तकलीफ बड़ी
फीरोजाबाद ग्लास सिटी है उद्योग के लिए किसी विधायक ने काम नहीं किया। शहर के पार्क बदहाल हैं विधायक न पांच साल में एक भी पार्क विकसित नहीं कराया। ट्रैफिक सिग्नल लाइट खराब हैं, सीसीटीवी कैमरे खराब हैं इन पर लाखों रुपया कई बार खर्च हो चुका फिर भी ये जनता के किसी काम के नहीं। ट्रांसपोर्ट नगर तो विधायक भूल ही गए। ये समस्याएं छोटी-छोटी हैं लेकिन तकलीफ बड़ी देती हैं।
एमसी गुप्ता (संस्थापक मोहिनिया फाउंडेशन)
प्रमुख ट्रेनों के ठहराव को सामूहिक दवाब की जरूरत
रेलवे सुविधा के नाम पर विधायक केंद्र सरकार पर दवाब नहीं बना पाते। कांच और चूड़ी उत्पादन का बडा शहर है। देश भर के व्यापारी यहां आते हैं। प्रमुख ट्रेनों का ठहराव न होने के कारण टूंडला और आगरा जाना पडता है। जिले के पांचों विधायक सामूहिक रुप से प्रमुख ट्रेनों के ठहराव के लिए केंद्र सरकार पर दवाब तो बना ही सकते हैं।
इं. एससी अग्रवाल (रीजनल सेक्टरी रोटरी क्लब)
स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देेने की जरूरत
स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विधायकों को गंभीर होना पडेगा। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए शासन से पैसा बहुत आता है लेकिन लाभ मरीजों को नहीं मिल पाता। अज्ञात शवों और अज्ञात घायलों के लिए विधायक कुछ काम करें तो बेहतर होगा। यहां टीबी के मरीज बहुत हैं कभी तो किसी विधायक को टीबी मरीजों की स्थिति देखने आना चाहिए।
निर्भय गुप्ता - (प्रबंधक सद्भावना सेवा समिति)
शिक्षा के क्षेत्र में आगरा पर निर्भरता खत्म हो
शिक्षा के क्षेत्र में विधायकों ने सार्वजनिक रुप के कभी कुछ नहीं किया। जबकि विधायक निधि का अधिकांश हिस्सा स्कूलों को दिया जाता है। लेकिन उन्हीं स्कूलों को पैसा जाता है जो लोग विधायकों के
आसपास रहते हैं। अच्छी शिक्षा के लिए यहां के बच्चे आज भी आगरा पर निर्भर हैं। चुनाव लड़ने वाला प्रत्याशी शिक्षा के क्षेत्र में कुछ घोषणा करें।
शैलेंद्र चतुर्वेदी (मीडिया प्रभारी माथुर चतुर्वेदी शाखा सभा)
चर्चा के खास बिंदु
- ई-रिक्शा पर पूरा प्लान तैयार हो। इन दिनों शहर में ई-रिक्शा समस्या बन गए हैं
- स्वकर के नाम पर टैक्स वसूली रूकनी चाहिए।
- टोल टैक्स पर स्थानीय वाहनों से वसूली रूके। प्रशासन इस पर स्थिति साफ करे
- शहर में वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू हो
- 28 साल बाद भी फीरोजाबाद में रोडवेज का डिपो नहीं बना
- डाकघर की सेवाएं अभी भी मैनपुरी मंडल के अधीन हैं