फिरोजाबाद। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे है, वैसे-वैसे सैफई परिवार पर मुसीबत के बादल घिरते जा रहे हैं। हर बूथ तक पकड़ बनाने का दावा करने वाली समाजवादी पार्टी को पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी भारी पड़ सकती है। महर्षि वाल्मीकि की शोभायात्रा में सैफई परिवार के महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव व पूर्व सांसद अक्षय यादव के न पहुंचने पर पार्टी की महिला मोर्चा की जिला महासचिव ने इस्तीफा देकर पार्टी पर संगीन आरोप लगाए हैं। कहा कि शादी व दंगल में जाने का समय है, लेकिन वाल्मीकि समाज से परहेज है। समाजवादी पार्टी की महिला मोर्चा की जिला महासचिव ममता कठेरिया ने समाजवादी पार्टी से सोमवार को इस्तीफा दे दिया। ममता कठेरिया ने इस्तीफा देने का कारण सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव, पूर्व सांसद अक्षय यादव द्वारा समाज की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। ममता ने इस्तीफा देते हुए कहा कि 26 अक्तूबर को महर्षि वाल्मीकि शोभायात्रा की अध्यक्ष होने के कारण मैंने स्वयं पार्टी के वरिष्ठ नेता को शोभायात्रा का उद्घाटन करने के लिए प्रो. रामगोपाल यादव, दीप प्रज्ज्वलन के लिए अक्षय यादव को निमंत्रण दिया था, लेकिन यह दोनों लोग शोभायात्रा में शामिल नहीं हुए। इतना ही नहीं पार्टी के शिकोहाबाद के विधायक डॉ. मुकेश वर्मा, सिरसागंज के विधायक सर्वेश यादव, जसराना के विधायक सचिन यादव ने भी आने की बात कही थी, लेकिन सभी विधायक ने भी उनके न आने पर कार्यक्रम में नहीं पहुंचे।
शाम छह बजे तक सभी लोग आने की बात करते रहे थे। उन्होंने कहा कि दलित वाल्मीकि की शोभायात्रा होने के कारण सैफई परिवार के दोनों लोगों ने दूरी बनाई। जबकि प्रो. रामगोपाल व पूर्व सांसद अक्षय यादव उसी दिन एफएम वाटिका फिरोजाबाद में शादी समारोह व फरिहा के गांव इटौरा में दगंल समारोह में मौजूद थे। सपा जिलाध्यक्ष शिवराज सिंह यादव ने बताया कि अक्षय यादव का कार्यक्रम नहीं था, प्रो. रामगोपाल यादव का स्वास्थ्य खराब हो गया था। इसके कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। पार्टी पर जो आरोप लगाए जा रहे है, वह निराधार है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष की पैरवी से मिला पद एक दिन में हटा था
वहीं कुछ दिनों पहले सपा के एक पूर्व जिलाध्यक्ष को प्रदेश स्तर पर पद देकर जिम्मेदारी दी गई, लेकिन महज 24 घंटे में ही वह पदमुक्त कर दिए गए। बताया जाता है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की पैरवी से उन्हें पद मिला था। लेकिन जिले में सैफई परिवार से जुड़े लोगों ने पदमुक्त करवा दिया। इसके कारण भी उनसे जुड़े लोगों में काफी निराशा है। इसी तरह नगर निगम चुनाव से ठीक पहले एक ब्राह्मण पदाधिकारी को एकाएक पदमुक्त कर दिया गया।