पालीवाल आडिटोरियम में स्वकर के संबंध में प्राप्त आपत्तियों पर अंतिम सुनवाई की गई, जिसमें अफसरों को जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। सभी ने एक स्वर से स्वकर का विरोध करते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया।
नगर आयुक्त रामऔतार रमन की अध्यक्षता में आपत्तियों की सुनवाई गई। पूर्व सभासद अशोक दिवाकर ने कहा कि यह मजदूरों का शहर है। मजदूर एवं गरीब वर्ग के अनुसार ही टैक्स लगाया जाए। अभी जनता को पालिका की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, निगम की तो बात करना ही बेमानी है। नई आबादी के बाशिंदों का कहना था कि जनता को पानी, सफाई, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। पूरा जोर वसूली पर दिया जाता है। हाजीपुरा के बाशिंदों ने कहा आम जनता में नगर निगम बनने की कोई खुशी नहीं है। महंगाई के दौर में काम धंधे चौपट पड़े हैं। हमारी बात कोई सुनने को तैयार नहीं है। सतीशचंद्र अग्रवाल ने कहा कि फीरोजाबाद नगर निगम की आबादी आठ लाख है, जबकि प्रदेश के अन्य नगर निगमों की आबादी 25 लाख से ऊपर है। यहां 70 प्रतिशत श्रमिक वर्ग है। यदि यहां स्वकर लगाया तो जनता पलायन को मजबूर हो जाएगी। वार्ड नं. 32, 33, 35, 38, 39, 40 व 41 के बाशिंदों ने आकाशवाणी रोड, रामगढ़ रोड, शीशग्रान, झमैया ओला सहित अन्य क्षेत्रों में पेयजल समस्या उठाते हुए स्वकर का कड़ा विरोध किया। वाहिद अली ने क्षेत्र की समस्याएं उठाते हुए स्वकर लागू न करने की बात रखी। करीब दो घंटे सुनवाई के दौरान स्वकर लगाने पर कोई भी सहमत नजर नहीं आया। पूर्व सभासद सुनील मिश्रा के आह्वान पर सभी ने स्वकर का कड़ा विरोध करते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया।
प्रशासक को कोई टैक्स लगाने का अधिकार नहीं
बुजुर्ग अधिवक्ता ने आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि शासनादेश में स्पष्ट है कि प्रशासक को कोई टैक्स लगाने का अधिकार नहीं है। इस संबंध में हाईकोर्ट द्वारा भी आदेश दिए गए हैं। प्रशासक का कार्य व्यवस्थाओं को सुधारना है। मेयर, पार्षद चुनकर आएं, तब स्वकर लागू होना चाहिए।