जैसे ही भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध किया, वैसे ही मैदान में जय श्री राम के नारे लगना शुरू हो गए। रावण के पुतला दहन के साथ ही धर्म की अधर्म पर, सत्य की असत्य पर जीत हो गई। इसके बाद से देर रात्रि तक शहर में आतिशबाजी की गई।
दशहरा के पावन पर्व शहर में जगह-जगह श्रीराम लीला लीलाओं का मंचन किया गया। श्रीराम लीला महोत्सव व रेलवे रामलीला महोत्सव में रावण वध की लीलाओं का मंचन देखने को भारी संख्या में लोग पहुंचे। लीला में सबसे पहले रावण के पुत्र नारायणतक राम-लक्ष्मण के साथ युद्ध करने पहुंचता है, परंतु वह ज्यादा देर तक श्रीराम की सेना के आगे टिक नहीं पाता। इसके बाद अहिरावण युद्ध के लिए आता है। अहिरावण ने राम व लक्ष्मण दोनों को काफी छकाया। विभीषण द्वारा अवगत कराने बाद राम ने उसके रक्त को जमीन पर नहीं गिरने दिया। तब जाकर उसका वध होता है। इसके बाद अभिमानी लंकाधिपति रावण स्वयं ही युद्ध के मैदान में पहुंच गया। जहां राम-रावण का घमासान युद्ध हुआ। रावण द्वारा अनेकों मायावी शक्तियों का प्रयोग किया। राम-रावण का युद्ध काफी लंबे समय तक चला। बाद में विभीषण ने युद्ध के मैदान में पहुंचकर राम को बताया कि रावण की नाभि में अमृत है। जानकारी मिलने पर श्रीराम ने सीधा अग्रिवाण रावण की नाभि में मारा। इससे रावण धरासायी हो गया। रावण वध के साथ ही मैदान में जय श्रीराम के जयकारे लगते रहे। दशहरा मेला देखने को आसपास के गांवों सहित हजारों की संख्या में लोगों ने पहुंचकर रामलीला व रावण दहन का आनंद लिया।
मेघनाथ, कुंभकरण व रावण के पुतला दहन
टूंडला ब्यूरो। रेलवे मंचीय रामलीला में मेघनाथ वध, अहिरावण वध, नारायंतक वध, व रावण मोक्ष की लीलाओं का मंचन किया गया। मैदान में रावण, कुंभकरण व मेघनाथ के पुतले बनाए गये हैं। मेघनाथ का पुतला 25 फीट का, कुंभकरण का 30 फीट और रावण का पुतला 40 फीट का बनाया गया। वहीं नगर रामलीला में रावण का पुतला करीब 50 फीट का बनाया गया। देर रात रावण दहन का दहन किया गया। दहन के साथ ही मैदान में भगवान श्रीराम के जयकारे लगते रहे।
फोटो-टूंडला में जलता रावण का पुतला व जलते पुतले को देखते दर्शक