अहंकार मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है। अहंकार ही था जिसने कौरवों का नाश कर दिया। रावण ने राक्षस कुल का सफाया करा दिया। यह बात में हुमायूंपुर के न्यू गांधीनगर में चल रही श्रीमद्भागवत सप्ताह के दौरान प्रवचन करते हुए कथा वाचक नारायण शास्त्री ने कही।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के पतन का कारण काम, क्रोध, लोभ, मोह व अहंकार आदि ही हैं। मनुष्य रावण जैसे राजा का भी अहंकार भी नहीं रहा। श्रीराम ने ऐसे अहंकारी के अहंकार को तोड़ दिया। स्वयं को ईश्वर कहलाने वाले हिरण्य कश्यप का अहंकार भी नहीं रहा। इन सभी को भी सुख वैभव छोड़कर जाना पड़ा। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह ईश्वर में आस्था रखे और ईश्वर की भक्ति करें तभी उनको इस लोक से मुक्ति मिल सकती है।