फीरोजाबाद। नगर निगम के द्वारा मनमाने ढंग से ओवरब्रिज की नीचे की भूमि को किराए पर उठाने के मामले को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक ने काफी गंभीरता से लिया है। उन्होंने नगर आयुक्त को पत्र भेजकर इसका जवाब मांगा है। स्पष्ट किया है कि इस भूमि का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एवं सड़क व परिवहन राजमार्ग केंद्रीय मंत्रालय की अनुमति के बिना किसी को नहीं दिया जा सकता है। पत्र आने के साथ ही निगम में खलबली मच गई है।
नगर निगम द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या दो में सेंट्रल बैंक से लेकर नगला मिर्जा बीनस आटो तक बने ओवरब्रिज के नीचे की खाली भूमि को होटल एवं रेस्टोरेंट संचालकों के साथ ही सुविधा संपन्न लोगों को 50 हजार रुपये किराया वसूलने के साथ आवंटित कर दिया। भूमि आवंटन के साथ ही होटल संचालकों ने खुद ही जमीन की घेराबंदी करनी शुरू कर दी। कइयों ने तो रेलिंग लगाकर एक दूसरे छोर से आने जाने पर भी रोक लगा दी। नगर निगम के इस कदम से सबसे अधिक परेशानी गरीब तबके के लोगों को हुई जो दो जून की रोटी कमाते थे। छोटे-छोटे ट्रांसपोर्ट के भी संचालक हैरान हैं।।
अमर उजाला ने इन सभी की पीढ़ा को काफी प्रमुखता से प्रकाशित किया था। नगर निगम की मनमानी की खबर के बाद एनएचएआई ( भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के परियोजना निदेशक एसबी सिंह ने नगर निगम के आयुक्त को पत्र भी जारी किया है। पत्र में स्पष्ट किया है कि फ्लाई ओवर के ही नीचे की भूमि का वाणिज्यक प्रयोग पार्किंग, दुकान के लिए नहीं किया जा सकता है। उन्होंने आयुक्त से पूरी ही स्थिति को स्पष्ट करने को कहा है। पीडी ने साफ कहा है कि उक्त भूमि का उपयोग भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार की अनुमति के बिना नहीं हो सकता है।
हमें एनएचएआई से कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। ओवरब्रिज को महज सौंदर्यीकरण के मद से दिया गया है।
रामौतार रमन, नगर आयुक्त