यदि सच्चे संतों पर कोई परेशानी आती है तो ईश्वर उनकी पूरी मदद करते हैं। संतों की संगत से बुरे से बुरे व्यसन में लगा व्यक्ति भी सुधर जाता है और परमात्मा की भक्ति में लीन हो जाता है। यह बातें रति गढ़ी नगला बीच स्थित राजवती इंटर कालेज में आयोजित जय गुरुदेव के सत्संग में आध्यात्मिक शिष्य परम संत उमाकांत महाराज ने कहीं।
उन्होंने कहा कि एक बार संत कबीर को गांव से भगाने के लिए गांव के दुष्ट प्रकार के लोगों ने ढिंढोरा पिटवा दिया कि कबीर की कुटिया पर कल सभी की दावत है। दूसरे दिन सभी गांव वाले सुबह से हाथ में अपने-अपने पात्र लेकर कुटिया की तरफ पहुंचने लगे। यह देख कबीर समझ गए कि यह किसी दुष्ट का प्रचार है। वह भय के कारण छिप गए और प्रभु का स्मरण करने लगे। प्रभु ने उनकी बात रखने के लिए कामधेनु गाय, रिद्धी-सिद्धी और कल्पवृक्ष को कुटिया के आसपास भेज दिया। तीनों ने मिलकर गांव वालों को भरपेट भोजन और तृप्त कर सम्मान सहित विदा किया। उन्होंने कहा कि छिपे बैठे संत कबीर जब बाहर निकले तो देखा गांव वाले उनका गुणगान कर रहे हैं। यह देख उनकी आंखें नम हो गई और उन्होंने प्रभु का स्मरण करते हुए कहा कि प्रभु आज आप मेरा साथ नहीं देते तो मैं जिंदा नहीं रहता। इससे यह साफ है कि संतों की ईश्वर हमेशा रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि शाकाहार अपनाने, मदिरा पान नहीं करने, गौ रक्षा करने से जीवन अच्छे से कटेगा। यदि ऐसा नहीं करोगे तो गंभीर परिणाम भुगतने होते हैं। सत्संग समापन पर हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सत्संग समारोह में भक्तों को नियंत्रित करने के लिए जवाहर लाल इंटर कालेज की एनसीसी की एक बटालियन लगाई गई। इनका निधि प्रकाश सिंह, कुलदीप जादौन, कंपनी कमांडर संजय ठेनुआ और विमलेश सिंह का निर्देशन रहा।