आगरा में खंडपीठ स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन शुक्रवार
को उग्र हो गया। अधिवक्ता न्यायालय परिसर से जुलूस के रूप में दौकेली रेलवे
क्रांसिंग पहुंचे। यहां नारेबाजी करते हुए अधिवक्ताओं ने कानपुर से दिल्ली
जा रही रीवा एक्सप्रेस को रोक दिया। ट्रेन के रुकते ही रेल विभाग में
हड़कंप मच गया। पुलिस ने अधिवक्ताओं को समझा-बुझाकर ट्रैक से हटवाया। बाद
में, अधिवक्ताओं ने मांग के संबंध में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सिटी
मजिस्ट्रेट को सौंपा।
आगरा में खंडपीठ की मांग को लेकर न्यायालय परिसर
में बार अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद यादव की अध्यक्षता में शुक्रवार को बैठक
आहूत की गई। बैठक में अधिवक्ताओं ने कहा यदि केंद्र सरकार ने खंडपीठ की
मांग को जल्द पूरा नहीं किया तो फीरोजाबाद से दिल्ली तक पदयात्रा की जाएगी।
बैठक के बाद अधिवक्ताओं ने जुलूस निकाला। जुलूस के रूप में अधिवक्ता
दौकेली रेलवे फाटक पर पहुंच गए। अधिवक्ताओं के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम
के कारण सुरक्षा की दृष्टि से नगर मजिस्ट्रेट रमेश चंद्र, एसडीएम सदर,
तहसीलदार, सीओ सदर जगदीश सिंह के साथ मटसेना, मक्खनपुर और बसई मोहम्मदपुर
पुलिस फोर्स के साथ पहले से मौजूद थे। अधिवक्ता ट्रैक पर पहुंचे तो
अधिकारियों ने समझाने का प्रयास किया लेकिन अधिवक्ताओं की पुलिस और
प्रशासनिक अधिकारियों की नहीं सुनी।
अधिवक्ता गेट मैन की केबिल से लाल झंडी
निकाल लाए और ट्रैक पर गाढ़ दी। लाल झंडी के कारण कानपुर से दिल्ली जा
रही रीवा एक्सप्रेस रुक गई। इसके बाद अधिवक्ता ट्रेन के इंजन पर चढ़ गए और
खंडपीठ की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे। हालांकि कुछ देर बाद पुलिस और
प्रशासनिक अधिकारियों की बात पर अधिवक्ता मान गए और ट्रैक खाली किया गया।
अंत में बार अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद यादव ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन
नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा गया।
नहीं रोक पाए जियारत एक्सप्रेस
रीवा
एक्सप्रेस से पूर्व अधिवक्ताओं ने दिल्ली से कानपुर जाने वाली जियारत
एक्सप्रेस को रुकवाने का प्रयास किया। लेकिन वे उसे नहीं रोक सके। इसके बाद
अधिवक्ताओं ने ट्रैक पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दिखे परेशान
जियारत
एक्सप्रेस को रुकवाने का प्रयास करने के दौरान ट्रेन की गति बहुत तेज थी।
सीओ सदर और नगर मजिस्ट्रेट बार-बार अधिवक्ताओं को समझाने के साथ ही ट्रैक
से हटने की अपील कर रहे थे। इसके बावजूद अधिवक्ता सुनने को तैयार नहीं थे।
ऐसे में पुलिस और प्रशासन को अनहोनी की आशंका सता रही थी।
महिला अधिवक्ताओं ने निभाई अहम भूमिका
ट्रैक
जाम करने के लिए पुरुष अधिवक्ताओं के साथ महिलाएं अधिवक्ता भी आगे नजर
आईं। एआर शादमा के साथ अन्य महिला अधिवक्ता भी मौजूद थी। वहीं अन्य
अधिवक्ताओं में महासचिव सर्वेश यादव, उदयवीर सिंह, मुकेश शर्मा, लज्जाराम
राजपूत, प्रेम सिंह वर्मा, विमल यादव, गजेंद्र यादव, चंद्रजीत आदि मौजूद
थे।
दो मिनट रुकी ट्रेन
सीओ सदर जगदीश सिंह का कहना है कि
अधिवक्ताओं ने ट्रेन दो मिनट तक रोका। समझाने पर वे मान गए और ट्रेन गंतव्य
के लिए रवाना हो गई। यदि रेलवे अधिकारियों की ओर से तहरीर आती है तो जांच
कर कार्रवाई की जाएगी।