फिरोजाबाद। बार एसोसिएशन के सदस्य के रूप में वकालत करने वाले अधिवक्ता को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश प्रयागराज की अनुशासन समिति समीर खान एडवोकेट को 20 वर्ष तक विधि व्यवसाय भारत के किसी भी न्यायालय में करने से रोका लगा दी है तथा पंजीयन के समय अपने आपराधिक मुकदमों के शपथपत्र में न लिखने के कारण 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
आदेश में कहा गया कि आदेश की प्राप्ति होने की तिथि से 30 दिन के अंदर अर्थदंड की धनााशि को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में जमा कर दें अन्यथा उसका पंजीयन निरस्त करने की सिफारिश पंजीयन समिति से की जाएगी।
शिकायतकर्ता माहे निगार ने बार काउंसिल उत्तर प्रदेश की अनुशासन समिति में परिवाद दाखिल करते हुए कहा था कि वह दोनों पैरों से दिव्यांग है, जिसने अपने भाई के साथ एक प्लाट खरीदा था। शिकायतकर्ता ने अधिवक्ता पर प्लाट को हड़पने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने बार काउंसिल में अपना रजिस्ट्रेशन कराते समय शपथपत्र झूठे तथ्यों के आधार पर दिया है। उस पर तमाम आपराधिक मुकदमें विचाराधीन थे और शपथ पत्र में छिपा कर अधिवक्ता पंजीयन करा लिया है। अनुशासन समिति ने दोनों पक्षों को सुना और अधिवक्ता समीर खान को अधिवक्ता पंजीयन कराने के लिए दिये गये शपथपत्र में कूटरचित अभिलेख तैयार करने के कारण आदेश पारित किया। आदेश की प्रति जिलाधिकारी, जनपद न्यायाधीश एवं बार एसोसिएशन फिरोजाबाद को भेजी गई। बार ने आदेश को नोटिस बोर्ड पर चस्पा करके सार्वजनिक किया।