फिरोजाबाद। हैंडपंप रीबोर कराने, मनरेगा के तहत होने वाले तालाब जीर्णोद्धार कार्य में जेसीबी का प्रयोग करने एवं ग्राम विकास कार्यों में वित्तीय घालमेल के आरोप में डीएम ने ग्राम पंचायत जैंदामई के प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज करने के निर्देश जारी किए हैं। प्रधान के खिलाफ अंतिम जांच के लिए अधिकारियों की दो सदस्यीय टीम गठित की गई है। ग्राम पंचायत जैंदामई के प्रधान लाखन सिंह यादव के विरुद्ध विकास कार्यों में वित्तीय घालमेल किए जाने की शिकायतें थीं। इस पर जिला कृषि अधिकारी और अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण सेवा ने मामले की जांच की। जांच में ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्माणाधीन शौचालयों में घटिया ईंटों का प्रयोग होता मिला। गांव में निर्मित 50 शौचालयों की तकनीकी जांच में प्रति शौचालय 1500 रुपये कुल 75000 रुपये घालमेल किए जाने का भी आरोप सिद्ध हुआ।
वहीं ग्राम पंचायत के मजरों जैंदामई, गठिया, आलमपुर आनंदीपुर में वर्ष 2016-17 के दौरान एक लाख 20 हजार रुपये की धनराशि से हैंडपंप रीबोर कराने पर खर्च दर्शाया गया लेकिन जांच में पांच स्थानों पर हुए हैंडपंप रीबोर कार्य अधिकांश सामान पुराना डालने एवं सरकारी खर्च में नया सामान क्रय किए जाने की बात प्रकाश में आई। प्रधान द्वारा विकास कार्यों के नाम पर बरती गईं वित्तीय अनियमिताओं के एक अन्य मामले में तालाब जीर्णोद्धार कार्य में जेसीबी का प्रयोग कर ग्राम पंचायत के खजाने को 25000 रुपये का चूना लगाने की पुष्टि ग्रामीणों ने की। मामले में अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने प्रधान लाखन सिंह यादव को कई बार कारण बताओ नोटिस जारी किए लेकिन प्रधान द्वारा नोटिस का जवाब नहीं देने पर डीएम ने तत्काल प्रभाव के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारों को सीज करने के निर्देश जारी किए हैं।
4,26,170 रुपये की गड़बड़ी
जांच अधिकारियों द्वारा दी गई रिपोर्ट के मुताबिक ग्राम प्रधान लाखन सिंह एवं सचिव ने शौचालय निर्माण में अनियमितता बरतते हुए 75000 रुपये, हैंडपंप रीबोर के नाम पर 185185 रुपये के अतिरिक्त तालाब सफाई के नाम पर 25000 रुपये गबन किए जाने संबंधी आरोप प्रथम दृष्टया जांच में सही सिद्ध हुए।
अंतिम जांच कमेटी गठित
डीएम ने ग्राम प्रधान के विरुद्ध प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार सीज किए जाने की कार्रवाई के साथ ही अंतिम जांच के लिए जिला पशु चिकित्सा अधिकारी एवं एक्सईन लघु सिंचाई को जांच अधिकारी नामित किया है। कमेटी से 15 दिन में जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है।