सफल ऑपरेशन के बाद मौजूद चिकित्सकीय टीम। स्रोत स्वंय
फिरोजाबाद। गांव मटसमई निवासी संजय कुमार मौर्य के 11 माह के बेटे अभिराज मौर्य की जान उस वक्त खतरे में पड़ गई जब उसके सांस नली (एयरवे) में एक लॉकेट का टुकड़ा फंस गया। पांच दिन पहले अचानक सांस लेने में परेशानी होने पर परिजन ने स्थानीय डॉक्टर से परामर्श लिया, जहां उसे निमोनिया मानकर इलाज किया गया। परेशानी बढ़ी तो परिजन ट्रॉमा सेंटर लाए, जहां ईएनटी भानुप्रताप ने ऑपरेशन कर जान चाई।
बच्चे ने पांच दिन पूर्व खेलते में एक धातु से बना लॉकेट मुंह में रख लिया था। सांस लेने में दिक्कत हुई, परिजन ने स्थानीय डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने निमोनिया का इलाज शुरु कर दिया। स्थिति बिगड़ती गई। परिजन बच्चे को गंभीर हालत में सांस की तकलीफ और ऑक्सीजन सैचुरेशन गिरने की शिकायत के साथ लेकर अस्पताल पहुंचे। जांच के लिए कराए गए सीटी स्कैन में बच्चे की सांस नली में एक लॉकेट का टुकड़ा फंसा हुआ था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. भानुप्रताप सिंह द्वारा एंडोस्कोपिक प्रक्रिया के जरिए आपातकालीन ऑपरेशन कर लाकेट के टुकड़े को बाहर निकाला गया। ऑपरेशन सफल रहा और बच्चे की जान बच गई।
डॉ. भानुप्रताप सिंह ने बताया कि यह निगलते समय वस्तु का सांस नली में चले जाना का था। उन्होंने बताया कि इस तरह की लापरवाही के मामले बहुत आ रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि छोटे बच्चों को गहनों, सिक्कों या अन्य छोटे वस्तुओं से दूर रखें और यदि बच्चा अचानक खांसी, सांस लेने में दिक्कत या आवाज में बदलाव जैसी समस्या दिखाए, तो बिना देर किए विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराएं।