टूंडला। टूंडला रेल यार्ड में गुरुवार सुबह 11 बजे जबर्दस्त ट्रेन दुर्घटना से हड़कंप मच गया। जोर जोर से दुर्घटना साइरन बज उठा। रेल अधिकारी से लेकर कर्मचारी सभी दुर्घटना स्थल की ओर दौड़ पड़े। साइरन बजाती एंबुलेंस, आरपीएफ व रेलवे के विभिन्न विभागों की गाड़ियां यहां से वहां दौड़ने लगी।
दर असल रेलवे संसाधनों को और बेहतर बनाने के लिए रेल अधिकारियों व एनडीआरएफ के जवानों का टूंडला में संयुक्त रूप मॉक ड्रिल का आयोजन गुरुवार को किया गया। मॉकड्रिल में स्काउट-गाइड व ग्रामीणों की भी मदद ली गई । यह पहला मौका था जब एनसीआर में एनडीआएफ के साथ मॉकड्रिल हुई है।
कुछ फेल कुछ पास--
एटीएसएफ व रेलवे टीम के सदस्य आग पर काबू नहीं पा सके। कुछ गैस सिलेंडर खराब थे तो कुछ कर्मियों को उन्हें प्रयोग करना नहीं आया। वहींकोच में फंसे यात्रियों को छत काटकर सुरक्षित निकालने के टास्क में रेल कर्मचारियों की टीम ने एनडीआरएफ के जवानों को मात दी।
ये विभाग रहे शामिल-
दुर्घटना स्थल पर चिकित्सीय शिविर, टीएक्सआर, एसएनटी, विद्युत, यात्री सहायता बूथ, एकीकृत कमांड सेंटर, पुलिस सहायता बूथ के साथ हर स्टेशन के अलग से टेलीफोन सेवा चालू की गई थी। मॉकड्रिल में इलाहाबाद मंडल के अलावा झांसी, आगरा, दिल्ली मंडल समेत कई अन्य मंडलों से लगभग 100 से अधिक कर्मचारी, 10 बडे़ अधिकारी शामिल हुए।
मॉकड्रिल से मिलीं सीख-एडीआरएम
रेल दुर्घटना होने पर कोच में फंसे यात्रियों को किस प्रकार सुरक्षित बाहर निकाला जा सके, इसके लिए रेलवे ने एनडीआरएफ के जवानों के साथ मिलकर टूंडला में मॉकड्रिल कराई। एनडीआरएफ के साथ मॉकड्रिल करने से नई सीख मिली है। उनके अत्याधुनिक उपकरण मदद में सहायक हैं। रेलवे भी ऐसे उपकरण खरीदेंगे। ये बातें इलाहाबाद मंडल के सहायक रेल प्रबंधक दिनेश शुक्ला ने मॉकड्रिल के बाद पत्राकारों से कही। इस दौरान इलाहाबाद मंडल के एडीआरएम दिनेश शुक्ला, सीनियर डीएसओ वीके गौतम, सीनियर डीईएन अतुल गुप्ता, सीनियर डीईई अमिताभ शर्मा, मंडल यातायात प्रबंधक बृजेश मिश्रा, एनडीआरएफ प्रभारी राजकमल मलिक, गोपाल सिंह मीणा, स्टेशन अधीक्षक मोहन सिंह मीणा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
फोटो-टूंडला में पत्रकारों से वार्ता करते एडीआरएम दिनेश शुक्ला व अन्य-8