प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुहागनगरी की जनता को उम्मीदें बहुत थीं। उनकी उम्मीदों पर फिलहाल मोदी सरकार खरी उतरती नहीं दिखती। लोगों का मानना है कि मोदी सरकार को अभी और वक्त दिया जाना चाहिए। सौ दिन में किसी भी सरकार का पूरी तरह से आंकलन नहीं किया जा सकता। दिल्ली में भले ही विभागों में बदलाव दिखा हो लेकिन निचले स्तर पर केंद्रीय कार्यालयों में न अफसरों का रवैया बदला और न कर्मचारियों का। जन धन योजना में बैंकों अफसरों तेजी दिखाई लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे फिर से सब पुराने ढर्रे पर लौटता नजर आया और अभ्यार्थीं बैंकों के चक्कर काट रहें हैं। मनरेगा, निर्मल भारत अभियान, भारतीय साक्षरता मिशन, एनआरएचएम आदि सभी केंद्रीय योजनाओं की धन की दरकार है।
निर्मल भारत अभियान को धन की जरूरत
निर्मल भारत अभियान के तहत लोहिया गांव में शौचालय निर्माण के लिए 9.68 करोड़ धनराशि की डिमांड की गई थी। लेकिन सात करोड़ रुपया ही मिल सका। तीन करोड़ धनराशि नहीं मिलने के कारण शौचालयों को बनाने का काम अधर में लटका हुआ है। हालांकि डीएम विजय किरन आनंद शौचालयों के निर्माण पर जोर दे रहे हैं।
धनाभाव में थम गई मनरेगा की चाल
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को डीएम विजय किरन आनंद ने गति देने के प्रयास किया लेकिन धनाभाव के कारण गति नहीं पकड़ सकी। अगस्त तक मनरेगा योजना का 18 करोड़ 82 लाख एवं 63 हजार खर्च करने का लक्ष्य था। लेकिन अब तक महज छह करोड़ 12 लाख दस हजार रुपया ही खर्च हो सका है। करीब एक करोड़ 88 लाख रुपये का भुगतान तो अभी तक अटका पड़ा है। इसके कारण ही मनरेगा की गति थम गई है।
इंदिरा आवास योजना: पात्रों के चयन तक सीमित
इंदिरा आवास के पात्रों की चयन प्रक्रिया जिले में एक बार फिर प्रारंभ कर दी। जिले में 1068 एससी एवं 126 अल्पसंख्यक वर्ग के नए पात्रों का चयन किया गया। रजिस्ट्रेशन की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। खाते खुलवाए जा रहे हैं लेकिन धनराशि नहीं मिल सकी है।
सांसद निधि के आने का इंतजार
लोकसभा चुनाव को साढ़े तीन माह बीत जाने के बाद भी अभी तक सांसद निधि नहीं आई है। सांसद निधि के नहीं आने के कारण सांसद भी काम नहीं करा पा रहे हैं। सीडीओ हीरालाल ने कहा कि सांसद निधि तो अधिकांशत: एक साथ ही रिलीज होती है, लेकिन अभी नहीं आ सकी है।
1943 गांव-मजरों को विद्युतीकरण का इंतजार
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत जिले के विद्युतविहीन 1943 गांव और मजरों में विद्युतीकरण का कार्य होना है। 795 गांव और 1148 मजरे शामिल हैं। 182 करोड़ की इस योजना को मूर्त रूप नहीं ले सकी है। छह जनपदों में विद्युतीकरण के लिए 23 जुलाई को पुन: टेंडर कराए गए। कंपनियों ने 24 प्रतिशत अधिक रेट देने के कारण विद्युत नियामक बोर्ड द्वारा पुन: आपत्ति लगाते हुए टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी। विद्युत नियामक बोर्ड द्वारा तेजी से कार्य कराने को विभागीय स्तर पर टेंडर प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया गया है।
दम तोड़ती भारत साक्षर मिशन योजना
भारत साक्षर मिशन योजना के तहत बुजुर्गों को शिक्षित करने को शुरू की गई योजना की गति जिले में धीमी पड़ गई। 2012 में शुरू हुई योजना में पहले वर्ष 40 हजार रुपये मात्र प्रचार-प्रसार को मिला था। बजट अभाव में ब्लाक कोआर्डिनेटर इस्तीफा तक देने को विवश हो गए। योजना के तहत प्रेरकों को सिर्फ दो माह का ही वेतन मिला है।
एनआरएचएम योजना को नहीं मिला बजट
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना में करोड़ों रुपये के बजट की जरूरत होती है, लेकिन समय से पैसा नहीं आने के ही कारण योजना में हमेशा ही मानदेय के लिए मारामारी होती है। वित्तीय वर्ष 2014-15 में तो विभाग को बजट ही रिलीज नहीं हुआ है।
सरकार के 100 दिन पर .
भ्रष्टाचार :
भ्रष्टाचार के मामले में अभी कोई कारगर कदम सरकार नहीं उठा सकी है। कोई ऐसी योजना सामने नहीं आई, जिससे भ्रष्टाचार खत्म हो सकता है। सौ दिन के बाद अब लोगों का मोदी से मोह भंग होता नजर आ रहा है। भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
अनूप चंद्र जैन (प्रमुख अधिवक्ता)
उद्योग
किसी भी नई सरकार के लिए सौ दिन का समय बहुत अधिक नहीं कहा जा सकता। उद्योग की दृष्टि से मोदी सरकार इन सौ दिनों में कुछ फील गुड कराते दिखती है। गैस के रेट सरकार बदलते ही बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन अभी तक स्थिर हैं। लेकिन देखना है कि मोदी कांच उद्योग को क्या तोहफा देते हैं।
अजय सिंघल, उद्योगपति
सपा की प्रतिक्रिया :
देश की जनता को झूठे सपने दिखाने वाले नरेंद्र मोदी का असली चेहरा अब जनता के सामने आ चुका है। मोदी के सत्ता संभालते ही देश की सीमाएं असुरक्षित हो गईं। महंगाई ने लोगों का सुख चैन छीन लिया। देश में सांप्रदायिक हिंसा बढ़ गई। मोदी सरकार को 100 में से शून्य अंक दिए जाने चाहिए।
हरिओम यादव विधायक (सपा)
महंगाई :
अच्छे दिनों का सौ दिन बाद भी इंतजार है। लगता है इंतजार करते-करते पांच साल बीत जाएंगे और महंगाई बढ़ती रहेगी। लग रहा था मोदी के पीएम बनने पर महंगाई कम होगी लेकिन हम तो टमाटर का स्वाद ही भूल गए। ऐसी कोई चीज नहीं जो सस्ती हुई हो। महंगाई रोकने में मोदी अभी तो फेल हैं।
योगेंद्र प्रकाश जैन (समाजसेवी)
रोजगार :
युवाओं को मोदी ने रोजगार का सपना दिखाया है। इसके बावजूद सौ दिनों में रोजगार के अवसर नहीं पैदा किए गए हैं। हालांकि मोदी जिस ट्रैक पर चल रहे हैं, उससे उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है। रोजगार के अवसर मिलेंगे ऐसा लगता है।
राहुल तिवारी (छात्र एमएससी)
महिला सुरक्षा एवं उत्पीड़न:
प्रधानमंत्री मोदी से देश की जनता को उम्मीदें तो काफी थी। हालांकि वह उन उम्मीदों पर वह खरे नहीं उतरे। महिलाओं की सुरक्षा के बारे में कोई ऐसा कदम नहीं उठाया।
साजिया (शिक्षिका)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव से पूर्व जो बातें कहीं थी, उतना अमल नहीं किया। हालांकि सौ दिन में पूरे सिस्टम को तो नहीं सुधारा जा सकता। इसके बावजूद एक दो कठोर कदम तो वह उठा सकते थे ताकि महिलाएं सुरक्षित महसूस ही करतीं।
शालिनी गुप्ता (गृहणी)
महिलाओं की सुरक्षा के बारे में हम कह सकते हैं कि जिस प्रदेश में रहते हैं, वहां न तो पहले सुधार था, न सौ दिन में सुधार हुआ और न ही भविष्य में सुधार की गुंजाइश है। महिलाओं को सुरक्षा सरकार नहीं दे सकती, इसके लिए हमें सोच बदलनी होगी। केंद्र सरकार का सौ दिन का सवाल है तो यह समय काफी कम है।
अनुपमा शर्मा (स्कूल संचालक)
कानून की शिथिलता के कारण महिलाओं के साथ होने वाली घटनाओं में इजाफा हुआ है। कालेजों में महिलाओं के आत्मसुरक्षा का कोर्स सिखाना चाहिए। केंद्र एवं प्रदेश सरकार भी सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार है।
प्रीती श्रोत्रिय (समाजसेवी)