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‘इमरजेंसी’ में नहीं रहते चिकित्सक

Mon, 05 Aug 2013 05:33 AM IST
Firozabad
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सरकारी अस्पतालों में रविवार को ओपीडी जरूर बंद रहती है लेकिन इमरजेंसी सेवाएं चालू रहती हैं। वार्डों में भर्ती मरीजों के लिए स्टाफ की ड्यूटी रहती है। लेकिन रविवार को चिकित्सक आराम फरमाते हैं। अमर उजाला टीम ने रविवार को स्वास्थ्य सेवाओं को परखा तो लापरवाही ही नजर आई।
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आपातकालीन सेवा लचर, तड़पते हैं मरीज
फीरोजाबाद। डायरिया से पीड़ित आसमा दोपहर साढ़े बाहर बजे पिता नईम के साथ जिला अस्पताल आई। चिकित्सक मेडिकल करने में व्यस्त थे। बालिका उपचार के लिए तड़प रही थी। पीड़ित चिकित्सक के पास फरियाद लेकर पहुंची तो उसको फटकार कर भगा दिया। इस दौरान पीड़िता की मां चिकित्सक से बेटी के उपचार के लिए मिन्नत करती रही। करीब आधे घंटे के बाद बालिका को ड्रिप लगाई गई। बर्न वार्ड में मरीज भर्ती थे लेकिन स्टाफ कक्ष में ताला लगा था।
वार्ड नंबर तीन में पिछले कई दिनों से भर्ती नगला मुल्ला निवासी शाबरा बेगम की रविवार को छुुट्टी कर दी गई। पैर में प्लास्टर लगा होने के कारण वह चल फिर भी नहीं सकती थी। परिवारीजन उसको स्ट्रेचर पर लेकर गेट तक आए। आपातकालीन विभाग से भर्ती किए गए मरीजों को वार्ड तक पहुंचाने के लिए कोई इंतजाम न होने के कारण तीमारदार मरीज को वार्ड तक लाए।
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स्वास्थ्य केंद्र पर थी भीड़
रविवार दोपहर शिकोहाबाद स्वास्थ्य केंद्र पर आपातकालीन सेवाएं चालू थीं। डा. धर्मवीर सिंह मरीजों का उपचार कर रहे थे। भीड़ अधिक होने के कारण कुछ मरीजों के तीमारदार अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

घायलों को नहीं मिला पहले उपचार
पीएचसी टूंडला का हाल खराब था। डा. शाहिद खां 27 जुआरियों का मेडिकल करने में लगे थे, जबकि गांव चुल्हावली में घायल हुए पिता पुत्री अपना उपचार कराने के लिए बारी का इंतजार करते थक गई तो जमीन पर ही बैठकर आराम करने लगी लेकिन चिकित्सक को यह नहीं लगा कि पहले घायलों को उपचार दिया जाए।

नाम के लिए है आपातकालीन विभाग
सिरसागंज पीएचसी में स्थित आपातकालीन विभाग से मरीजों और घायलों को कोई लाभ नहीं होता। रविवार को विभाग तो खुला लेकिन चिकित्सक कक्ष से गायब थे। जानकारी करने पर कोई जबाव नहीं दे सका। मरीज अस्पताल से लौट कर जा रहे थे।

वार्ड में नहीं मिलते चिकित्सक
जसराना सीएचसी में झगडे़ में घायल मरीजों को अपने उपचार व मेडिकल रिपोर्ट के लिए घंटो इंतजार करना पड़ता है। रविवार को कटौरा निवासी राखी, नगला रामा निवासी पूनम, एवं दारापुर मिलावली निवासी रीना की डिलीवरी के बाद छुट्टी तो हो गई लेकिन उनको अल्पाहार नहीं दिया गया। चिकित्साधीक्षक डा. पंकज राकेश ने कहा कि मानक के अनुसार सीएचसी पर 12 चिकित्सक होने चाहिए लेकिन एक वो खुद तैनात हैं।


पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए सीएमएस से वार्ता की गई। अगर बर्न वार्ड के ड्यूटी कक्ष, सिरसागंज का आपात कालीन विभाग बंद है तो यह चिंता की बात है। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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डा. एके झिंदल, कार्यवाहक सीएमओ
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