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जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं नौनिहाल

Wed, 31 Jul 2013 05:33 AM IST
Firozabad
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फीरोजाबाद। प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा और परिवहन सुविधा के नाम पर बच्चों से मोटी फीस तो ली जा रही है लेकिन उन्हें खटारा बसों से स्कूल से घर तक का सफर तय कराया जा रहा है। वहीं आटो चालक भी पांच की जगह दस से पंद्रह बच्चों को बिठाकर उनकी जान जोखिम में डाल रहे हैं। परिवहन विभाग भी इस पर चुप्पी साधे बैठा है।
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हादसों के बाद भी स्कूल सबक नहीं ले रहा है। बसों में मानकों के विपरीत बच्चों को बैठाया जा रहा है। इतना ही नहीं कई स्कूलों ने कमाई के चक्कर में प्राइवेट वाहन संचालकों को ठेका दे दिया है। प्राइवेट वाहन संचालक बच्चों को सीटों से ज्यादा जबरन ठूंसकर बिठाते हैं।

आटो में बारह से पंद्रह बच्चे चल रहे
आटो चालकों ने अपनी कमाई बढ़ाने के लिए गाड़ी को स्कूल से अटैच कर दिया है। आटो में दस से पंद्रह बच्चे बिठाए जाते हैं। कई बच्चे तो पीछे लटककर जाते हैं। इस पर अभिभावक और न ही परिवहन विभाग की नजर जाती है।
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एआरटीओ नहीं करता जांच
स्कूली बसों एवं टैंपो चालकों की जांच के लिए बने मानक केवल कागजों पर दिखाए जा रहे हैं। एआरटीओ विभाग स्कूली बसों के साथ टैंपो की जांच नहीं करता है।

क्या होने चाहिए स्कूली बस के मानक
- बस के आगे एवं पीछे स्कूली बस लिखा होना चाहिए।
- बस के अंदर फर्स्ट एड बाक्स की सुविधा हो।
- स्टाफ सिग्नल होना चाहिए।
- आग बुझाने का यंत्र फायर इक्यूमेंट होना चाहिए।
- प्रत्येक सीट के नीचे बैग रखने का स्थान होना चाहिए।
- सीट के हिसाब से बच्चों को बैठाना चाहिए।
- छोटी मेटाडोर जो 21 सीटर होती है उसमें 25 से ज्यादा न बैठे हों।
- ड्राइवर के पास हैवी व्हीकल लाइसेंस पुलिस वेरिफिकेशन के साथ हो।
- प्रदूषण नियंत्रण की बस मेें हर छह माह में जांच होनी चाहिए।
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