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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राजनीतिक दलों में हलचल

Fri, 12 Jul 2013 05:30 AM IST
Firozabad
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फीरोजाबाद। दो दिन में सुप्रीम कोर्ट के दो महत्वपूर्ण आदेशों ने राजनीतिक क्षेत्र में हलचल मचा दी है। चुनावी माहौल में न्यायालय का यह आदेश कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक खेमों में मिली जुली प्रतिक्रिया है। दलों से जुड़े लोग आदेशों का स्वागत करते हुए सुझाव भी देते नजर आए। कुछ तल्खी से साथ यह कहते दिखे कि सुप्रीम कोर्ट का मामला है। अवमानना का डर है इस लिए खुल कर कुछ नहीं कह सकते। जनपद की राजनीति में भी जातीय सम्मेलन और रैलियां होती रही हैं। न्यायालय के आदेश से इसे झटका लगेगा।
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कानून बनाने का काम संसद का है
सपा विधायक हरिओम यादव का कहना है कि अपराधी राजनीति में न आएं इसे रोकने के लिए कानून सही है। जन आंदोलन के दौरान राजनीतिक लोगों के खिलाफ गलत भावना से मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं। यह व्यवस्था कानून में होनी चाहिए कि जन आवाज उठाने वाले लोग झूठे मुकदमों का शिकार न हों। न्यायालय के आदेश पर टिप्पणी करना ठीक नहीं जो भी आदेश है उसका सम्मान करते हैं। कानून बनाने काम संसद का है।

आदेश के हरेक पहलू को देखना होगा
सपा व्यापार प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सचिव राज नरायन गुप्ता मुन्ना कहते हैं कि जिन कमियों को राजनीतिक दल नहीं रोक पा रहे उसे सुप्रीम कोर्ट रोक रहा है। न्यायालय के आदेश का अवलोकन करना चाहिए। जातिवाद से देश की जनता तंग आ चुकी है। न्यायालय के आदेश का सम्मान किया जाना चाहिए। ऐसा न हो कि आदेशों का शिकार वो लोग हो जाएं जो जनता के लिए आंदोलन करते हैं और झूठे मुकदमों का शिकार होते हैं।
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न्यायालय के आदेश का सम्मान होना चाहिए
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद एसपी सिंह बघेल का कहना है कि सुुुप्रीम कोर्ट के दोनों ही आदेश स्वागत योग्य हैं। विस्तृत रूप से तभी कुछ कहा जा सकता है जब न्यायालय के आदेश का वह अध्ययन कर लें। अभी अधिक कुछ कहना ठीक नहीं। पूरे मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती ही अधिकृत हैं। वैसे न्यायालय के आदेश का वह सम्मान करते हैं।

रुकेगा राजनीति का अपराधीकरण
बसपा विधायक राकेश बाबू एडवोकेट कहते हैं कि न्यायालय के आदेश से राजनीति का तेजी से हो रहा अपराधीकरण रुकेगा। आपराधिक तत्व बचने के लिए राजनीतिक चोला पहने लगे हैं। जातीय सम्मेलन भी रुकने चाहिए।

मुकदमे राजनीतिक विद्वेष से तो नहीं
भाजपा विधायक मनीष असीजा कहते हैं कि आदेशों के अनुपालन के साथ यह भी देखना चाहिए कि जिन लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए हैं वह जन आंदोलनों के दौरान राजनीतिक विद्वेष के कारण तो नहीं हुए। समाज में जातीय व्यवस्था उस परमाणु ऊर्जा के समान है जिसका ठीक उपयोग समाज का भला कर सकता है और दुरुपयोग नुकसान।

सकारात्मक राजनीति को बढ़ावा मिलेगा
कांग्रेस के एआईसीसी सदस्य अतुल चतुर्वेदी कहते हैं कि सुुप्रीम कोर्ट के दोनों आदेश सकारात्मक राजनीति को बढ़वा देंगे। कांग्रेस ने कभी अपराध और जाति की राजनीति नहीं की है।

राजनीति का सुधारवादी चेहरा दिखेगा
प्रधानसंघ के अध्यक्ष राजेश प्रताप सिंह कहते हैं कि कुछ ही वर्षों में राजनीति का तेजी से अपराधीकरण हुआ है। सांसद और विधायकों पर भी मुकदमे चल रहे हैं। उन्हें वीआईपी सुविधाएं मिलती हैं। सुप्रीम कोर्ट का कानून पार्टी संगठनों को भी सुधारवादी चेहरा बनाने के लिए मजबूर करेगा।

मील का पत्थर साबित होंगे आदेश
सुहाग नगर निवासी नवीन प्रकाश उपाध्याय कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के दोनों आदेश भारतीय राजनीति में मील का पत्थर साबित होंगे। जो काम संसद नहीं कर सकी उसे सर्वोच्च न्यायालय ने कर दिखाया है। सभी दलों के लिए यह बड़ा सबक है।

सुप्रीम कोर्ट ने कमाल कर दिया
प्रबुद्ध शिक्षक रमेश चंद्र शर्मा कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने कमाल कर दिया। जहां देखो उसी दल में अपराधी नेता का चोला पहने संरक्षण पाए हुए हैं। अब सभी दलों के हाईकमानों को भी सोचना पडे़गा कि किसको पार्टी में शामिल करें। राजनीति में बढ़ रहा जातीय विद्वेष न्यायालय के आदेश से रुकेगा।
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