टूंडला। श्री आदिनाथ जिनबिंब, मानस्तम्भ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा कलशारोहण एवं विश्वशांति महायज्ञ महोत्सव के तीसरे दिन भगवान आदिनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इस महोत्सव में सबसे पहले आदिनाथ भगवान के जन्म लेने की खुशी में जन्मकल्याणक रथयात्रा निकाली गई। एक दर्जन से अधिक झांकियां निकाली गई। ऊंट, घोड़े, हाथियों पर सवार इंद्र-इंद्राणियां व अन्य देव विराजमान थे। सफेद ऐरावत हाथी पर इन्द्रदेव के स्वरूप भगवान आदिनाथ की प्रतिमा को लिए चल रहे थे।
शोभायात्रा महोत्सव पंडाल से प्रारंभ होकर मुख्य बाजार होते हुए दीपा के चौराहे फिर वहीं से वापसी होती हुई पुन: महोत्सव स्थल पर समाप्त हुई। कोहरे के चलते हेलीकाप्टर से पुष्पवर्षा नहीं हो सकी। शोभायात्रा में सत्येंद्र जैन, बलवीर सिंह जैन, ओमप्रकाश जैन, संजय जैन, बसंतजैन साहू, अनिल जैन आदि चल रहे थे।
जन्म के साथ तीनों लोक में उल्लास
एलाचार्य वसुनंदी महाराज ने आदिनाथ के जन्म का अपनी अमृतवाणी से वर्षाकर लोगों को भावविभोर कर दिया। जन्म का वर्णन करते हुए बताया जब माता मरू देवी के देखे पूर्व के स्वप्नों के आधार पर वैसा ही सुपुत्र उनकी गोदी में आ गया जिस आदि बालक को देखने के लिए सौधर्म इंद्र का आसन पु: कंपायमान हो जाता है। तभी इंद्र को ज्ञान हो जाता है कि भगवान आदिनाथ ने पृथ्वी लोक पर जन्म ले लिया। भगवान आदिनाथ को देखने के लिए उसकी आकांक्षा व्याकुल होने लगी। इंद्राणी प्रसूत गृह से बालक आदि कुमार को लाती हैं और सौधर्म इंद्र, भगवान के रूप एवं स्वरूप को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। दोनों नेत्रों से आदि बालक को देख जब इन्द्र की नेत्रों की तृप्ति नहीं होती तो इन्द्र अपने सहस्त्र नेत्र कर लेता है और फिर त्रिलोकीनाथ के रूप को निहारिता है त्रिलोकीनाथ के रूप को देख प्रसन्न मुद्रा में इंद्र ऐरावत हाथी पर प्रभु को विराजमान कर पांडुक शिला पर ले जाकर 1008 कलशों से अभिषेक करता है।
हेलीकाप्टर से पुष्पवर्षा देखने लगी भीड़
मंगलवार को हेलीकाप्टर द्वारा पुष्पवर्षा को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग इकठ्ठा हो गए थे। पहले से ही पुष्पवर्षा के लोग चयनित कर लिए गए थे, लेकिन कोहरा छाने और समिति द्वारा हुई अव्यवस्था के चलते जितने फेरे हेलीकाप्टर को लगाने थे उतने फेरे नहीं लगा सका। जिसके चलते अधिकतर जैन समाज के लोग पुष्पवर्षा करने से वंचित रह गए।