टूंडला। उठो देव, बैठो देव, दूध कटोरा पियो देव, कुंवारों के ब्याह होऐ, ब्याहेन के गौने होएं... की स्तुति के साथ शनिवार को देवोत्थान एकादशी पर्व पर घर-घर में सोये हुए देवों को जगाया गया। लोगों ने गन्ना, सिंघाड़ा आदि फलाें व सब्जियों से देवताओं का पूजन किया। विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाये गये।
शनिवार से घरों में मंगल कार्य शुरू हो गए। महिलाओं ने घरों को साफ कर रंगोली सजाई। पैरों के पंजे व हाथों की आकृति उकेरी और देवी-देवताओं के चित्र लगाकर गन्ना, सिंघाड़ा, बैंगन, मूली आदि फल सब्जियों से पूजन किया गया। देवताओं को दूध कटोरा देकर भोज कराया गया। देवोत्थान एकादशी महापर्व पर नगर में बारातों की धूम रही। नगर के सभी मैरिज होम बारातघर, धर्मशालाएं फुल रहे। लोगों का मानना है कि जिन जोड़ों का विवाह किसी अन्य तिथि में नहीं बनता उनके विवाह बिना मुहुूर्त के देवोत्थान एकादशी केदिन किये जा सकते हैं।
फोटो-टूंडला में देवों की पूजा-अर्चना करते महिलाएं-1, गन्नों की खरीदारी करते लोग-2