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रोजी के इंतजार में खड़े लोगों पर मौत का झपट्टा

Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
Firozabad
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फीरोजाबाद। गुलाबी सर्दी की सुबह सूरज की किरणें धरती के स्पर्श को आतुर थीं। रोजी-रोटी के लिए काम की तलाश में निकले मजदूरों की संख्या जाटवपुरी पर लगने वाली मंडी में बढ़ती जा रही थी। हाथ में खाने का टिफन लिए मजदूरों की नजर उनके श्रम के खरीदारों पर थी। कोई उनके श्रम की कीमत लगाने आता उससे पहले ही मौत उन्हें खींच ले गई।
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पल भर में जाटवपुरी चौराहे का नजारा बदल चुका था। कुछ फासले पर पडे़ पांच शव, खून से लाल हुई सड़क, मांस के लोथड़े, टिफिन, रोटी, सब्जी, जूते, चप्पल, कपड़े हादसे की वीभत्सता बयां कर रहे थे। अनियंत्रित ट्रक के रूप में आया मौत का झपट्टा पांच मजदूरों से उनकी जिंदगी छीन ले गया। मौत के इस वीभत्स मंजर को देख गुस्सा भड़का। हजारों की भीड़ हाईवे पर थी। आक्रोश, रंज और गम के साथ चीखपुकार मची हुई थी। अपनों को खोने के दर्द में परिवार वाले फूट-फूट कर रो रहे थे तो भीड़ भी उनके दुख में साथ देते हुए प्रशासन से दो-दो हाथ करने को तैयार थी। यही वजह थी जब शवों को जबरन उठाने का प्रयास किया तो संवेदनाओं पर चोट होते देख लोग भड़क गए और खाकी से भिड़ गए। दर्दनाक हादसे के दर्द के बाद चौराहे पर अब दूसरा नजारा था। तब तक सूरज भी सीना ताने उजाला बिखेर चुका था। सूरज के तेज के साथ ही खाकी ने भी लाठी लेकर भीड़ की खबर लेना शुरू कर दिया। भागो, बचाओ, मारो के शोर के बीच हवा में पत्थर उछलना शुरू हो गए। खाकी लाठी मार रही थी और भीड़ पत्थर फेंक रही थी। लगभग आधे घंटे की इस मोरचा बंदी में हाईवे पर पत्थर बिखरे पडे़ थे। भगदड़ में तमाम लोगों के जूते, चप्पल छूट गए। साइकिलें छोड़ राहगीर जान बचाने को दौड़ पडे़ थे। लगभग चार घंटे हाईवे पर दहशत पसरी रही। तनाव के चलते आवागमन जहां का तहां थम गया था। शाम करीब पौने पांच बजे पोस्टमार्टम के बाद जब शव जिला अस्पताल से निकल गए तभी पुलिस ने चेन की सांस ली।
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