टीटीएसपी घोटाले के मामले में परत दर परत जल निगम अफसरों की लापरवाही सामने आ रही है। विभाग के जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही के कारण ही घोटाले से जुड़ी फाइलें ऑफिस में न मिलकर ठेकेदारों के घरों से बरामद हो रही हैं। घोटाले में भुगतान के रिकार्ड में भी हेरा-फेरी होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सीडीओ पुन: सभी टीटीएसपी का सत्यापन कराने की तैयारी में है।
जल निगम को कुल 752 टीटीएसपी लगवाने का लक्ष्य मिला था। जल निगम ने टीटीएसपी स्थापित करने में शुरुआत से लापरवाही बरती। विभाग की लापरवाही का आलम यह रहा कि एक सैकड़ा से अधिक टीटीएसपी की फाइलें ढूंढे नहीं मिल रहीं। सूत्रों की मानें तो जल निगम में करोड़ों का घपला उजागर होने के बाद मचे हड़कंप के बाद करीब 506 फाइलें विभाग को मिली थीं। यही नहीं करीब 117 फाइलें ठेकेदारों के घर पर मिलीं। इस तरह कुल 623 टीटीएसपी की फाइलें मिल गई हैं। डीएम के सख्त रुख के बाद भी अभी तक तकरीबन 130 टीटीएसपी से जुड़ी फाइलें ढूंढे नहीं मिल रही हैं। टीटीएसपी के भुगतान का रिकार्ड भी सही नहीं मिला है। ऐसे में सीडीओ ने नए सिरे से टीटीएसपी का सत्यापन कराने का निर्णय लिया है। टीटीएसपी के सत्यापन के लिए प्रशासनिक अफसरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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टीटीएसपी में हुआ करीब 10 करोड़ का घपला
जल निगम को 752 टीटीएसपी लगाए जाने के लिए करीब 65 करोड़ की धनराशि प्राप्त हुई थी। एक टीटीएसपी लगाने में करीब सात से आठ लाख का खर्चा आता है। डीएम के निर्देश पर सीडीओ ने विस्तृत जांच कराई, जिसमें 623 टीटीएसपी से जुड़ी फाइलें मिली। अभी तक 130 टीटीएसपी का ब्योरा नहीं मिला। ऐसे में करीब 10 करोड़ का घोटाला होने की बात सामने आ रही है।
टीटीएसपी के घोटाले के मामले में दोबारा से फाइलों को खंगाला जा रहा है। विभाग के पास 506 टीटीएसपी की फाइलें थीं। वहीं 117 टीटीएसपी की फाइलें ठेकेदारों के पास मिलीं। अभी तक करीब 130 टीटीएसपी का कोई ब्योरा नहीं मिला है। इसके लिए दोबारा से टीम को भेजा गया है। मामले की पूरी तरह से जांच होगी, जो भी मामले में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
सुजीत कुमार-सीडीओ