फिरोजाबाद। बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण पर शासन सख्त हो गया है। अब निजी एवं सरकारी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण प्रक्रिया को जांचने के लिए स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाएगा। बीते दिनों लखनऊ में हुई बैठक में सीएमओ को बायोमेडिकल निस्तारण पर सख्ती करने के निर्देश मिले। सरकारी से लेकर प्राइवेट क्लीनिक और नर्सिंग होम्स को हर हाल में नियमों का पालन कराने के लिए कहा है।
अस्पतालों से निकलने वाले कचरे से संक्रामक रोगों के फैलने का डर रहता है। बायोमेडिकल का निस्तारण करना शासन ने अनिवार्य कर दिया है। हालांकि यह नियम पूर्व में था। किंतु अब इसका पालन सख्ती से कराने के लिए निर्देशित किया है। सीएमओ डॉ. एसके दीक्षित ने बताया कि प्रत्येक अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के लिए लाल-पीले डिब्बे रखना बहुत जरूरी है। अगर क्लीनिक पर ऐसे डिब्बे नहीं मिले तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
इस तरह होगा बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण
- पीला डिब्बे में- ऐसे डिब्बों में सर्जरी में कटे हुए शरीर के भाग, लैब के सैम्पल, खून से युक्त मेडिकल की सामग्री (रुई/ पट्टी) ड़ाली जाती हैं।
- लाल डिब्बा- इसमें दस्ताने, कैथेटर, आईवी सेट, कल्चर प्लेट को डाला जाता है।
- नीला या सफ़ेद बैग- इसमें गत्ते के डिब्बे, प्लास्टिक के बैग जिनमें सुई, कांच के टुकड़े या चाकू रखा गया हो उनको डाला जाता है।