वर्ष 1996 तक कोयले से संचालित पुरानी 433 इकाइयों की सूची उद्योग विभाग ने तैयार कर ली है। हार्डकॉपी के साथ कंप्यूटराइज्ड सूची भी तैयार कराई जा रही है। विभाग की ओर से फाइनल सूची पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को भेजी जाएगी।
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय कांच उद्योग से होने वाले प्रदूषण एवं क्षमता विस्तार की हकीकत जानना चाहता है। वर्ष 1996 जब कोयले से 433 कांच इकाइयों का संचालन होता था, उस समय इकाइयों की कोल कैपेसिटी कितनी थी।वर्ष 1996 के बाद गैस से इकाइयां संचालित होने के कितनी गैस की खपत हो रही है। उसके सापेक्ष कितना उत्पादन हो रहा है। गैस से संचालित होने के बाद उत्पादन बढ़ा है। वहीं, कितनी इकाइयों द्वारा क्षमता विस्तार किया गया। प्रदूषण की क्या स्थिति है। मंत्रालय द्वारा गठित टीम 14 दिसंबर को फीरोजाबाद में आकर कांच इकाइयों में उत्पानदन व प्रदूषण का हाल देख चुकी है। उद्योग विभाग से पुरानी 433 और वर्तमान में संचालित 203 इकाइयों का पूरा डाटा तलब किया है। उद्योग विभाग 15 दिसंबर से पुरानी व नई इकाइयों का डाटा बनाने में जुटा है। 18 दिन मशक्कत के बाद 433 इकाइयों की सूची तैयार हो चुकी है। उपायुक्त उद्योग वीरेंद्र कुमार का कहना है कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के आदेश पर पुरानी 433 व वर्तमान में संचालित 203 इकाइयों की सूची लगभग तैयार हो चुकी है। फाइल सूची तैयार कर जल्द मंत्रालय को भेज दी जाएगी।
उत्पादन क्षमता के ऊपर निर्भर लंबित इकाइयों का भविष्य
उद्योग विभाग द्वारा पर्यावरण मंत्रालय पुरानी 433 व वर्तमान में संचालित 203 कांच इकाइयों की कोल कैपेसिटी के आधार उत्पादन क्षमता का आकलन किया जाएगा। उत्पादन क्षमता वर्ष 1996 के आसपास रहती है तब लंबित इकाइयों को मंत्रालय की हरी झंडी मिल सकती है।