गर्मी में भूगर्भ जलस्तर घटने से क्षेत्र के यमुना तटवर्ती के करीब एक सैकड़ा और मजरों में पेयजल संकट पैदा हो गया है। मजरों की हालत तो बदतर है। लोग गांव के बाहर लगे निजी नलकूपों से प्यास बुझाते हैं। 50 फीसदी हैंडपंप पानी की जगह हवा दे रहे हैं। वहीं रिबोरिंग के लिए कई सालों से दस फीसदी हैंडपंप इंतजार कर रहे हैं। शिकायतों के बाद भी विभाग के अधिकारी अनजान बने हैं।
विजयीपुर विकास खंड के बिकौरा, जलंधरपुर, गढ़ीवा, मंझिगवां, मडौली, थुरियानी, रघुबरवर डेरा, नरतनडेरा, कुम्हारनपुर, अरहियापुर, लोहंगपुर, चंदापुर, चितनपुर, पोखरी, दसईपुर, हरदासपुर, बरियासपुर और धाता विकास खंड के सेमरी, दामपुर, तुलसीपुर, सलेमपुर, किशनपुर, ऐरई, कोट, दौलतपुर, सहित करीब एक सैकड़ा गांवों में भूगर्भ जलस्तर कम होने से पेयजल की समस्या पैदा हो गई है। करीब 40 फुट जलस्तर घट गया है।
जिससे 110-120 फुट बोरिंग वाले हैंडपंप बेकार हो गए हैं। वहीं कुओं से तो पानी का नामोनिशान मिट गया है। लोगों को पानी के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती हैं। गांवों में लगे अधिकांश हैंडपंप खराब हैं। ग्रामीण जगन्नाथ, शिवबली निषाद, रामनरेश सिंह, श्रीराम, छेदीलाल, राजबहादुर, रामसजीवन, जितेंद्र सिंह और भोला निषाद ने बताया कि करीब एक साल पहले हैंडपंप खराब हो गए थे।
कई बार ग्राम प्रधान और अधिकारियों से शिकायत की गई है लेकिन ठीक नहीं हुआ। खंड विकास अधिकारी पीसी यादव ने बताया कि सभी ग्राम प्रधानों से खराब हैंडपंपों की सूची मांगी गई है। जल्द ही हैंडपंप ठीक करा दिए जाएंगे।