बहुआ। कोर्राकनक गांव के पास बोरहा नाले में हत्या कर फेंकी गई युवती की शिनाख्त तीसरे दिन हुई। युवती जहानाबाद कस्बे की रहने वाली थी और दो जून से लापता था। इसकी गुमशुदगी भी परिजनों ने दर्ज कराई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की बात सामने आई है। दुष्कर्म की आशंका में स्लाइड बनाई गई है। जहानाबाद पुलिस अब हत्या की धाराओं में दर्ज रिपोर्ट को तरमीम करेगी।
ललौली थानाक्षेत्र के कोर्राकनक गांव पास बोरहा नाले में 15 जून को युवती की लाश मिली थी। जिसकी पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस ने हत्या कर शव नाले में फेंके जाने की आशंका जताई थी। गुरुवार को जहानाबाद कस्बे के सोनराही गली, गंगानगर निवासी शिवप्रसाद रैदास व उनके भाई देवेंद्र कुमार पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। युवती की पहचान शिवप्रसाद ने बेटी मोनिका देवी (19) के रूप में की। शिनाख्त के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मोनिका की गला दबाकर हत्या की बात सामने आई है। स्लाइड भी बनाई गई है।
पिता शिवप्रसाद ने ललौली पुलिस को बताया कि उनकी बेटी दो जून की सुबह करीब साढ़े 11 बजे बिना बताए घर से निकली थी और फिर नहीं लौटी। तीन जून को उसकी गुमशुदगी जहानाबाद थाने में दर्ज कराई गई थी और खोजबीन चल रही थी। बताया कि मोनिका ने बीएससी की छात्रा थी। घर में मां सियादुलारी, भाई देवेंद्र कुमार, वीरेंद्र कुमार, धीरेंद्र, नरेंद्र व बड़ी बहन विनीता (विवाहित) है। शिवप्रसाद गांव-गांव सौंदर्य उत्पाद की फेरी लगाते हैं। एसओ ललौली संदीप तिवारी ने बताया कि शव मिलने पर पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया था। लेकिन इस मुकदमे की जांच जहानाबाद पुलिस करेगी, क्योंकि जहानाबाद में पहले से युवती के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज है।
फतेहपुर। जिले की पुलिस कितनी चुस्त-दुरुस्त है, इसकी पोल इस घटना ने खोल दी। दो जून से लापता जिस युवती की तलाश का दावा जहानाबाद पुलिस कर रही थी, उस थाने के अधिकारियों को 48 घंटे तक यह भी पता नहीं चला कि एक युवती शव बोरहा नाले में मिला है।
15 जून की दोपहर करीब तीन बजे शव मिला और 17 जून दोपहर करीब ढाई बजे उसकी शिनाख्त हुई। इस बीच के करीब 48 घंटे जहानाबाद पुलिस शायद सोती रही। युवती के परिजनों को अमर उजाला अखबार की मदद से एक युवती का शव मिलने की जानकारी हुई तो वह मर्च्युरी हाउस पहुंचे और शव की शिनाख्त की। अब इस बात को समझना ज्यादा कठिन नहीं है कि जिले की पुलिस गुमशुदगी के मामले में कितनी लापरवाह है। अगर परिजनों को शव मिलने की जानकारी न हो पाती तो शायद युवती का अंतिम संस्कार अज्ञात में कर दिया जाता। शिनाख्त के अभाव में पुलिस आरोपियों तक पहुंचने का भी शायद प्रयास न करती और मामला पिछली ऐसी कई घटनाओं की तरह दब जाता।