मौसम की उठापटक के बीच संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ा है। पिछले दो दिन में मरीजों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। शायद ही ऐसा कोई घर हो जिसमें संक्रामक बीमारी से कोई न कोई सदस्य जकड़ा न हो। सीएचसी, पीएचसी व जिला अस्पताल सहित निजी चिकित्सकों के यहां रोजाना मरीजों की भीड़ लगी रहती है।
मौजूदा समय में मौसमी बुखार व खांसी-जुकाम के रोगी सर्वाधिक उभर कर सामने आ रहे है। पानी बरसने से त्वचा रोगी भी सामने आ रहेे हैं।
नाक, कान और गला का रोग भी बढ़ने लगा है। बच्चों व उम्रदराज की तादाद काफी है। बुधवार को सदर अस्तपाल की ओपीडी में सोमवार व मंगलवार की तरह एक बार फिर से मरीजों को रेला दिखाई दिया।
ऐसे में सामने आने वाले मरीज को देखने में डॉक्टर रश्म अदायगी करते नजर आए। शायद यही वजह रही कि एक मरीज पर कुछ मिनट देने के बाद नेक्स्ट की आवाज डॉक्टर लगाते सुने गए।
उधर, ओपीडी में भारी भीड़ होने से डॉक्टर्स चैंबर के बाहर से लगने वाली लाइनों में धक्का-मुक्की भी होती रही। पहले दिखाने के चक्कर में मरीज और उनके तीमारदार तू-तू और मै-मै करते सुने गए।
ओपीडी में भीड़ देख कर करीब 30 फीसदी मरीज बिना डॉक्टर को नब्ज पकड़वाए लौट गए। कमोबेश यही स्थिति सीएचसी में भी नजर आ रही है।
सदर अस्पताल के सीएमएस डॉ एके मिश्र कहते हैं कि मौजूदा सेवाएं बेहतर तरीके से मरीज को दी जा रहीं हैं। यह समय एहतियात बरतने का है। सजगता से संक्रामक हमले से बचा जा सकता है।
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इमरजेंसी में संक्रामक रोगी
फतेहपुर। मरीजों की भरमार के चलते आकस्मिक सेवाएं मुहैया कराने वाले इमरजेंसी रूम में संक्रामक रोग का उपचार होता रहा। ईएमओ आने वाले मरीज को परामर्श देने का काम करते रहे। ओपीडी में भीड़ के कारण तमाम रोगियों को इमरजेंसी रूम का सहारा लेना पड़ा।
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नहीं उतर रहा कानों से आला
फतेहपुर। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से संक्रामक रोगियों की क्लीनिक व नर्सिंग होम में भरमार है। सुबह से रात तक प्राइवेट इलाज के इन ठिकानों में मरीजों और उनके तीमारदारों का मजमा लग रहा है। सुबह नंबर लगाने वाले मरीज को दोपहर चिकित्सीय परामर्श मिल पा रहा है। मौजूदा समय में नामी-गिरामी डॉक्टर समेत गांव देहात के झोलाछापों की बन आई है।