मौत के मुंह से बाहर निकल कर आए दंपति
- फोटो : अमर उजाला
रविवार की भोर हादसाग्रस्त हुई इंदौर-पटना एक्सप्रेस ने सवार मुसाफिरों में दहशत भर दी। मौत का मंजर बिल्कुल करीब से देखने वाले यकीनन अपने-अपने ठिकाने पर लौट आए हैं लेकिन उनकी सकुशलता पर अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है। आंखों में खौफनाक मंजर मंडरा रहे हैं, जिसे यह चाहकर सालों साल ओझिल नहीं कर सकते हैं।
सूबे के पुखरायां रेलवे स्टेशन के पास हादसाग्रस्त हुई इंदौर-पटना एक्सप्रेस में खागा के नीमटोला निवासी अंबरीश सिंह भदौरिया भी सफर कर रहे थे। यह कृषि विभाग में बीडीएम पद पर कार्यरत हैं। बकौल अंबरीश, वह बीमार भतीजे को सप्ताह भर पहले देखने इंदौर गए थे। शनिवार वह इसी ट्रेन से घर के लिए निकले। एसी कोच में रिजर्वेशन कंफर्म नहीं होने पर एस-12 कोच में सीट ले ली। ब्लाक डेवलपमेंट मैनेजर की मानें तो उनके साथ जौनपुर जिले के बीएन तिवारी भी सफर कर रहे थे। ट्रेन रात 12 बजे झांसी से गुजरी तो दोनों लोग बात करते करते सो गए। अंबरीश ने बताया कि रविवार की भोर तीन बजे उनकी नींद खुली तो शौच के लिए जैसे ही बढ़े, ट्रेन जोरदार झटके के साथ रुक गई।
यकायक ट्रेन रुकने से उन्होंने साथी मुसाफिर को जगा कर जैसे ही कूपे के बाहर झांका। नजारा देख दिल दहल गया। समूचा बदन थरथरा गया। हर तरफ धुंआ था। क्षतिग्रस्त हुए कूपों से चीख पुकार सुनाई दे रही थी। वह ईश्वर को धन्यवाद देते हुए कूपे से नीचे उतरे और घाटमपुर में रहने वाले रिश्तेदार की मदद से सड़क तक आए। इस दर्दनाक मंजर को देखने वाले इंदौर शहर के सुरेश चंद्र मोदनवाल अपने बेटे राहुल का विवाह हथगाम थाना के छिवलहा कस्बे में कर रहे हैं। बारात 30 नवंबर को है। वह बेटे की होने वाली ससुराल के लिए पत्नी सुषमा के साथ निकले थे। बकौल केशरवानी, वह जिस कूपे में सवार थे, वह हादसे के बाद क्षतिग्रस्त हो गई थी। जैसे तैसे वह उससे बाहर निकले तब सांसत में पड़ी जान को तसल्ली मिली।