श्रीमद्भागवत कथा में बाल लीलाओं का वर्णन सुन श्रद्धालु भक्ति सागर में गोते लगाते रहे। गीत संगीत के बीच कथा सुनने के लिए भक्तों की भीड़ बढ़ रही है।
खुशवक्तराय नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत महोत्सव के पांचवें दिन पंडित भरत बाजपेयी ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। पूतना वध को उन्होंने अविद्या का नाश बताते हुए कहा कि जिस दिन हमारे अंदर की अविद्या नष्ट होती है तो छह विकार अपने आप समाप्त हो जाते हैं। संसार में मनुष्य मोह माया के चक्कर में आकर भटकता रहता है। ईश्वर की सच्ची आराधना से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कृष्ण नाम की व्याख्या करते हुए कहा कि जो कभी कमजोर न पड़ता हो वही कृष्ण है। कृष्ण चरित्र सुनकर सांसारिक विषमताओं का जमकर सामना करना चाहिए। गोवर्धन पूजा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संपूर्ण संसार को बचाने के लिए प्रकृति की सुरक्षा करनी होगी नहीं तो संपूर्ण संसार नष्ट हो जाएगा।
जैसा कि आज देखने को मिल रहा है। रास लीला को उन्होंने आत्मा और परमात्मा का मिलन बताया। कथा में मधुसूदन दीक्षित, उज्जैन सिंह, मोहन सेठ, अंबिका प्रसाद, रामभवन सिंह, राम किशोर मिश्र, उमाकांत द्विवेदी, विजय पाल आदि मौजूद रहे।