जेल के गेट में लाइन लगाए मुलाकाती
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वाराणसी जेल में आक्रोशित बंदियों के उठाए दुस्साहसिक कदम के पीछे दो जून की रोटी का मामला उभर कर आया है। यहां की जेल में भी निरुद्ध बंदियों का हाल ऐसा ही है। भले ही बंदी जेल पुलिस के रौब पर मुंह नहीं खोल सकते हैं। इन हालातों में बंदियों का भड़कना लाजिमी है। कारागार प्रशासन मानक के अनुरूप खाने का इंतजाम करने का दावा करता है।
सच यह है कि जेल में भी मालदार और रसूख वाले बंदियों का इकबाल बुलंद है। रसूखदार बंदी आर्थिक स्थिति से कमजोर बंदियों के हक में मिलने वाले रोटियों को रुपये और ताकत के बल पर छीन लेते हैं। उन्हीं रोटियों को अपनी बैरक में जलाकर उससे दाल फ्राई करते हैं।
इसी से बेस्वाद सब्जी को स्पाइसी भी बनाते हैं। बाकी बंदियों को पेट की आग बुझाने के लिए उबले पानी में गिने-चुने दाने दिखने वाली दाल से ही गुजारा करना पड़ता है। रविवार को जेल में मिलने आए मुलाकातियों की लंबी भीड़ रही। इसमें पहली शिफ्ट में 126 लोगों ने मुलाकात की, वहीं दूसरी शिफ्ट में 70 मुलाकाती पहुंचे।
काफी संख्या में मुलाकात करने वालों के हाथों में सामान भरे झोले दिखे। झोले में सब्जियां, मेवा, मिष्ठान, कड़वा तेल, रिफाइंड था। मुलाकात करने आए लोगों ने बताया कि यह सब कुछ अपने बंदियों को पहुंचा देंगे। काफी ऐसे बंदी भी हैं जिनसे महीनों और सालों से कोई मुलाकात करने ही नहीं पहुंचा।
जेल में आए मुलाकातियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बंदियों तक सामान पहुंचाने के लिए उन्हें रकम अदा करनी पड़ती है। जेल के मुख्य गेट पर तलाशी के दौरान बीस रुपये, दूसरे गेट पर सामान के अनुसार रेट लगते हैं। इसके एवज में चाहे जो भी सामान हो उसे अंदर ले जाया जा सकता है। चोरी छिपे लोग नशे की सामाग्री तक बंदियों तक पहुंचाते हैं।