फतेहपुूर। महाशिवरात्रि से मौसम का बदला मिजाज शनिवार को भी बरकरार रहा। तड़के तीन मर्तबा आसमान से बूंदाबांदी हुई। सारा दिन बादल छाए रहने से किसानों की चिंता बढ़ गई। खासकर लाही और सरसो उत्पादक किसानों की हालत देखते बनी। वह आसमान निहारते हुए बारिश न होने की ऊपर वाले से दुआएं मांगते दिखाई दिए।
शनिवार को दोपहर में कुछ देर के लिए ही भाष्कर की आंखें खुली नजर आईं। सारा दिन बदली रही। धूप न निकलने से मौसम में सुहानी सर्दी का अहसास होता रहा। शुक्रवार की ओलावृष्टि और कहीं कहीं पर तेज पानी बरसने से सहमा किसान दिनभर का नजारा देखकर भविष्य की संभावनाओं में खोया नजर आया। तड़के चार बजे से पांच बजे के बीच तीन मर्तबा बूंदाबांदी होती रही। कोरसम के बड़े काश्तकार कर्णवीर सिंह परिहार का कहना है कि अगर घाघ की कहावत पर विश्वास करें तो इस समय पानी बरसना खेती के लिए खासा नुकसानदायक है। प्रगतिशील किसान रणविजय सिंह का कहना है कि बरसात का खतरा टला नहीं है। ऐसे में किसान की आंख की नींद उड़ गई है। पहले ही चना खराब हो चुका है। अगर बरसात होती है तो लाही और सरसो का पटना तय है।