फतेहपुर। शहर की आबादी के मध्य गंदगी से बजबजा रहे तालाब संक्रामक बीमारियों को फैलाने का जरिया बने हुए हैं। लोगों के घरों का गंदा पानी इन तालाबों में जमा हो रहा है और उसकी दुर्गंध से आसपास के लोगों के संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। महामारी होने के बावजूद नगर पालिका ने अभी तक गंदे पानी से पटे तालाबों में वैक्टीरिया नाशक दवा का छिड़काव नहीं कराया है। कोरोना जैसी बीमारी फैलने के बाद भी यहां के लोग नहीं चेत रहे हैं।
रेलवे कालोनी के मध्य स्थित तालाब में कालोनी के साथ गंगानगर के बड़े हिस्से के घरों का गंदा पानी जाता है। इतना ही नहीं लोग मरे हुए मवेशी भी इसी तालाब के किनारे फेंक देते हैं। सफाई कर्मी तालाब किनारे कूड़ा भी डंप करते हैं। मवेशी के शवों की सड़ाध से लोगों का जीना हराम हो गया है। इसी तरह जयरामनगर मोहल्ले के मध्य स्थित तालाब के आसपास से दुर्गंध के कारण निकलना कठिन हो रहा है। गंदे पानी में लोग घरों से निकलने वाला कूड़ा कचरा तालाब में फेंकते हैं, जिसकी सड़ांध लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। सबसे खराब स्थिति इमिलिहाबाग तालाब की है। आसपास मुस्लिम आबादी है। यहां पर लोग सरेआम तालाब में मरे जानवरों की हड्डियां डाल देते हैं।
खास बात तो यह है कि इन तालाबों के आसपास हर साल उल्टी दस्त की बीमारी फैलती रही है।
नगर पालिका के सफाई निरीक्षक राकेश कुमार गौड़ का कहना है कि सफाई कर्मियों को तालाबों में कूड़ा कचरा डालने पर प्रतिबंध लगा है। लोगों को भी तालाबों में गंदगी न फेंकने के लिए जागरूक किया जाता है। समय-समय पर गंदे पानी के तालाबों में वैक्टीरिया नाशक दवा के घोल का छिड़काव भी कराया जाता है।
विनोद पासवान का कहना है कि गर्मी में गंदे पानी से भरे तालाबों से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अक्सर परिवार का कोई न कोई सदस्य मच्छरजनित बीमारी से पीड़ित रहता है। मच्छरों के कारण घरों के अंदर बैठना मुश्किल होता है। नगर पालिका तालाबों में वैक्टीरिया नाशक दवाओं का छिड़काव नहीं कराती है।
हीरा लाल का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग लोगों को सलाह देता है कि घरों के आसपास जलभराव न होने दें, लेकिन शहर की बड़ी आबादी के घरों के आसपास गंदे पानी के तालाब हैं। लोग चाहते हुए भी घरों के आसपास जलभराव खत्म नहीं कर सकते हैं। इस समस्या का निदान नगर पालिका पंपिंग सेट से पानी नालों के रास्ते निकलवाकर कर सकती है।
लवकुश गुप्ता कहते हैं कि आबादी के मध्य के तालाबों को लोग जानबूझ कर गंदा कर रहे हैं। तालाबों में घरों से निकलने वाला कूड़ा कचरा डालते हैं, जिससे लोगों में बीमारियां फैलती हैं। इसके बावजूद लोग इसकी परवाह नहीं करते हैं। लोग घरों का कूड़ा कचरा तालाबों में डालने के बजाय डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाले वाहन को दें।
अरुण कुमार का कहना है कि तालाबों के आसपास की आबादी में मच्छरों की बाढ़ आई हुई है। कोरोना संक्रमण के साथ इन मोहल्लों में उल्टी-दस्त जैसी संक्रामक बामारियों का खतरा पैदा हो गया है। इसके बावजूद नगर पालिका चुप्पी साधे है। नगर पालिका ऐसी आबादी में दवा का छिड़काव कराने के साथ फागिंग कराकर लोगों का समस्या से निजात दिला सकती है।