जिले के अधिकतर कोल्ड स्टोरों में हाउसफुल का बोर्ड लग गया है। भंडारण गृहों का गेट बंद होने के बावजूद भी आलू से भरे ट्रैक्टरों की लाइन स्टोरों के सामने लगी हुई है।
बाजार में भाव की कमी और स्टोर में जगह की कमी से आलू किसानों के घरों में सड़ने की कगार पर पहुंच गया है। ऐसे में किसानों की लाखों रुपये की लागत डूबते नजर आ रही है।
जिले के 16 भंडारगृहों में 11 करोड़ 38 लाख 23 हजार क्विंटल आलू भंडारण की क्षमता है। इसके बावजूद भी किसानों को आलू जमा करने में मारामारी करनी पड़ रही है।
इन कोल्ड स्टोर में थरियांव के दो, बिलंदा का एक, शहर के पांच और बिंदकी क्षेत्र के कई स्टोरों में हाउस फुल का बोर्ड लगाकर गेट बंद कर दिया गया है।
जबकि स्टोर कर्मचारियों ने कुछ बडे़ किसानों के नाम की पांच से लगाकर दस हजार तक की पर्ची काट रखी है, जिससे 100-200 बोरी रखने वाले किसानों को भटकना पड़ रहा है।
कोल्ड स्टोर फुल होने से आलू का बाजार भाव भी गिर गया है। स्टोरों में भंडारण की जगह न होने से करीब 30-35 फीसदी आलू किसानों के घरों में डंप है। गर्मी को देखते हुए आलू को ज्यादा दिन तक घर में नहीं रखा जा सकता है। यही सारी मजबूरियां आलू के गिरते दामों की वजह बनी हुई हैं।