दूसरे गांव में झोपड़ी बना रह रहे पलायन गांव के लोग।
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गंगा नदी में बाढ़ से जिले की पांडु नदी ने विकराल रूप ले लिया है। पिछले चार दिन से आसपास की सैकड़ों बीघा फसलें डूबी हुई हैं। गंगा के तेज बहाव से तटवर्ती गांव कालीकुंडी में कटान बढ़ गया है। कटान के भय से पलायन हुए परिवारों ने दरियापुर गांव की सरकारी कालोनियों में डेरा डाल दिया है। हालांकि बाढ़ से अभी तक किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है।
भिटौरा मापक यंत्र के अनुसार रविवार को गंगा नदी का पानी खतरे के निशान से मात्र 800 मिमी नीचे बह रहा है। शनिवार की अपेक्षा रविवार को 90 मिमी गंगा नदी में पानी बढ़ा है। इससे बेनी खेड़ा में मिलने वाली पांडु नदी की दूसरी धारा से गंगा नदी का पानी वापस आकर फसलों में तबाही मचा दिया है। खेतों में भरा पानी चार दिन बाद भी कम नहीं हुआ है।
गंगा की बाढ़ में सबसे पहले कालीकुंडी गांव कटान की चपेट में आता है। प्रशासन ने 15 साल पहले दरियापुर गांव में बाढ़ राहत कालोनियां बनवाई थी, जिसमें कालीकुंडी गांव के नौ परिवार घर गृहस्थी का सामान और पशुओं को लेकर कालोनियों में बस गए हैं और भगवान से गंगा नदी बाढ़ के कटान को रोकने की प्रार्थना कर रहे हैं।
एडीएम आलोक सिंह ने बताया कि गंगा तटवर्ती क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण में है, जो फसलें डूब गई हैं, उनके अलावा किसी प्रकार की जनहानि का खतरा नहीं है। तहसील स्तरीय अधिकारी और कर्मचारियों को अलर्ट रहने और तहसील कार्यालयों में सूचना देने निर्देश दिए गए हैं।