फतेहपुर। स्वास्थ्य विभाग ने ‘हेपेटाइटिस बी’ संक्रमण की रोकथाम के लिए अलर्ट जारी किया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि सरकारी य निजी चिकित्सालयों में प्रसव के 24 घंटे के अंदर नवजात शिशु को ‘हेपेटाइटिस बी’ की एक डोज अवश्य लगवाएं, क्योंकि यह शिशु को संक्रमण से बचाएगी।
सीएमओ ने कहा कि ‘हेपेटाइटिस बी’ दिखाई न देने वाली बीमारी है, जो धीरे-धीरे हमारे लीवर को खराब करती है। यह बीमारी एक बार यदि किसी को हो जाती है, तो वह उम्र भर संक्रमित रहता है एवं दूसरों को भी प्रभावित करता है। यह संक्रमण रक्त, लार, योनि तरल पदार्थ और वीर्य जैसे संक्रमित शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क से फैल सकता है।
यह मां से उसके बच्चे में भी फैल सकता है। हेपेटाइटिस बी के टीके से इसको सुरक्षित और प्रभावी तरीके से रोका जा सकता है। यह वायरस के खिलाफ लगभग सौ प्रतिशत सुरक्षा प्रदान करता है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ सुरेश कुमार ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति डायबिटीज से पीड़ित है, तो उसे हेपेटाइटिस होने का खतरा ज्यादा रहता है। हेपेटाइटिस बी से संक्रमित अलग-अलग व्यक्ति में अलग-अलग लक्षण पाए जाते हैं। इस दौरान पीड़ित व्यक्ति की आंखें पीली हो जाती हैं। पेट में दर्द होने लगता है और पेशाब का रंग गहरा हो जाता है। कई लोगों में हेपेटाइटिस बी के लक्षण नहीं दिखते हैं।
खासकर के बच्चों में अगर इसका संक्रमण है तो पता लगाना मुश्किल होता है। अगर यह बीमारी लंबे समय तक रहती है, तो लीवर काम करना बंद कर देता है और कैंसर या घाव हो जाता है। हेपेटाइटिस बी को टीके से रोका जा सकता है। सभी शिशुओं को जन्म के बाद जितनी जल्दी हो सके (24 घंटे के भीतर) हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाना चाहिए।
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47 सेंटरों में निशुल्क टीका लगाया जाता
जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में संस्थागत प्रसव की सुविधा है। इसके साथ ही उप स्वास्थ्य केंद्र मिलाकर 47 सेंटरों में हेपेटाइटिस बी का निशुल्क टीका लगाया जाता है। जिले में अप्रैल 2023 से लेकर अभी तक 50486 बच्चों को हेपेटाइटिस बी का टीका लगाया गया है।
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