प्रमुख मुसलिम नेता व जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने धार्मिक सहिष्णुता को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका में नस्ल भेद है और हिंसक घटनाएं हो रही है। राष्ट्रपति बराक ओबामा के मुंह से भारत में धार्मिक असहिष्णुता बढ़ने की बात करना अच्छा नहीं लगता है।
उन्हें अमेरिका का माहौल सुधारने की बात करनी चाहिए। कहा भारत के आंतरिक मामलों में ओबामा को नसीहत देने की जरूरत नहीं है।
वह जमीयतुल शुब्बानुल मुस्लिमीन के बैनर तले रविवार को शहर के मुराइन टोला स्थित दुल्हन पैलेस में आजादी-ए-हिंद व तामीर-ए-वतन कांफ्रेंस में शामिल होने आए थे।
धर्म के आधार पर मुसलमानों को आरक्षण दिये जाने से असहमत मौलाना मदनी ने कहा कि गरीबी के आधार पर रिजर्वेशन मिलना चाहिए।
मौलाना महमूद मदनी ने साफ कहा कि कुछ लोग नफरत की बातें कर देश में विकास के एजेंडे को पहिये से उतारना चाहते हैं।
ज्वालागंज स्थित होटल डिप्लोमेट में हुई खास बातचीत में मदनी ने कहा कि सांप्रदायिक बात कर देश के विकास में बाधा पैदा नहीं करनी चाहिए।
इसके लिए उन्होंने किसी पार्टी या सरकार को जिम्मेदार तो नहीं ठहराया लेकिन पूछे जाने पर इतना जरूर का कि सरकार को भी ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे विकास प्रभावित न हो।
उन्होंने इराक के आतंकी संगठन आईएस को जिहादी बताने पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि आईएस जिहादी नहीं बल्कि फसादी है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका किस हैसियत से भारत को सबक सिखा रहा है। जबकि उसने खुद ही जुल्म किए हैं। भारत के आंतरिक मामले में ओबामा को बोलने का अधिकार नहीं है।
कहा कि वह पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति को देश में बुलाने का विरोध करते, लेकिन यह ठीक नहीं होता क्योंकि उन्हें न्यौता भारत की तरफ से दिया गया था और हिंदुस्तान मेजबान था।
यह पूछे जाने पर कि उनकी मेहमान नवाजी तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। इस पर वह हंसकर जवाब टाल गए।
ओछी राजनीति पर करारा हमला करते हुए कहा कि राजनीतिक दल सेक्युलर नहीं होते हैं, बल्कि भारत के लोग सेक्युलर हैं, जिनकी राजनीति कुछ दल करते हैं।