श्रम कानून में बदलाव के खिलाफ लामबंद देश के 10 मजदूर संगठनों की एक दिनी हड़ताल का जिले में भी व्यापक असर देखने को मिला। राज्य कर्मचारी महासंघ व संयुक्त परिषद के आह्वान पर जुटे कर्मचारियों ने केंद्र व प्रदेश सरकार को जमकर कोसा। विरोध में कुछ बैंकों के साथ एलआईसी व दूर संचार कर्मी भी शामिल हुए। हालांकि परिवहन ने इससे किनारा रखा।
यह हड़ताल केंद्रीय, औद्योगिक और राज्य कर्मचारी संगठनों के बैनर तले हुई। सरकारी दफ्तरों में ताला बंद कर नहर कालोनी पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए विरोध दर्ज कराया। धरने की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष कृतार्थ सिंह ने सांतवें वेतन आयोग की रिपोर्ट एवं मजदूरों के लिए बने नियम पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने पुरानी पेंशन बहाली, ठेका प्रथा बंद करते हुए आउट सोर्सिंग समाप्त किए जाने, स्कीम वर्कस एवं आशा बहू, आशा संगिनी, रोजगार सेवक, शिक्षा मित्र, पीआरडी, रसोइयां आदि को मानदेय की बजाय न्यूनतम वेतनमान दिए जाने की मांग की। इस धरने को काली शंकर श्रीवास्तव, मनोज वर्मा, रानी पटेल, कुसुम तिवारी ने संबोधित किया।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने जाम किया चौराहा
महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के बैनरतले कार्यकत्रियों व सहायिकाओं ने पटेलनगर चौराहा पर हुंकार भरी। कार्यकत्रियों व सहायिकाओं ने विरोध में पटेल नगर चौराहे पर जाम लगाकर अपनी बात कही। जिलाध्यक्ष सुनंदा तिवारी ने कहा कि नौ अगस्त को क्रांति दिवस के अवसर पर 17 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा गया था। एक सितंबर तक का समय दिया गया था। इसके बावजूद शासन स्तर से ठेंगा दिखाया गया है जिससे विरोध के लिए सड़क पर उतरना पड़ा है। इस दौरान गीता सिंह, रेहाना परवीन, बसंती सोनकर, ममता मिश्रा, अरुणा मिश्रा, पूनम यादव, रीता सोनी मौजूद रहीं।
एलआईसी कर्मी भी दहाड़े
एलआईसी शाखा में शुक्रवार को हड़ताल का आयोजन हुआ। हड़ताल के चलते पॉलिसी धारकों को परेशान होना पड़ा। कर्मचारियों ने एक स्वर में केंद्र सरकार की श्रमिक नीतियों का विरोध करते हुए आगे बड़ी लड़ाई का एलान किया। सचिव ने केंद्र सरकार को पूंजीपतियों की कठपुतली करार दिया। इस दौरान विनोद सिंह, राम कुमार, आशीष तिवारी, अनुराग श्रीवास्तव, ज्ञानदत्त, राज सजीवन, सियाराम सिंह, अर्चना, अनामिका, मधुलता श्रीवास्तव मौजूद रहीं।
कुछ बैंकों में भी तालाबंदी रही
इस एक दिनी हड़ताल का असर कुछ बैंकों मेें भी देखने को मिला। बैंक आफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक जैसी बैंकों में तालाबंदी होने से आए ग्राहकों को निराशा हाथ लगी। ऐसे में धन निकासी को आए इन बैंक के खाताधारकों को दूसरे बैंकों के एटीएम का सहारा लेेते देखा गया। एसबीआई में जरूरी काम काज होता रहा।
बीएसएएनएल दफ्तर में भी विरोध के स्वर मुखर
बीएसएनएल इंपलाइज यूनियन संचार निगम एसोसिएशन ऑफ टीटीएज, बीएसएनएल मजदूर संघ के आह्वान पर दूर संचार विभाग में आम हड़ताल हुई। जिला सचिव बालू लाल पाल ने कहा केंद्र सरकार को घेरते हुए 12 सूत्री मांगों को रखा। जिसमें महंगाई पर नियंत्रण के लिए फौरन कदम उठाने से लेकर मालिकों के हित में श्रम कानून में संशोधन न किए जाने की वकालत मुख्य रही।