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महंगाई की आंधी में बुझे उज्ज्वला के चूल्हे

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फतेहपुर। गैस की बढ़ती कीमतों ने उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलिंडर लेने वालों के चूल्हे बुझा दिए हैं। कुछ गरीब परिवारों ने तो अपना चूल्हा और गैस सिलिंडर ही बेच दिया है और लकड़ी से मिट्टी के चूल्हे पर खाना पका रहे हैं। गैस एजेंसी मालिकों का कहना है कि उज्ज्वला के 16 फीसदी भी लाभार्थी गैस रिफिल नहीं कराते हैं।
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हर सरकारी बैठक में गांव की गरीब महिलाओं को सशक्त बनाने के नाम पर जिस उज्ज्वला योजना के आंकड़े बढ़-चढ़कर बताए जाते हैं, उसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जिन गरीब परिवार को योजना से गैस सिलिंडर और चूल्हा दिया गया, उनमें महज 16 फीसदी ही गैस रिफिल करा पा रहे हैं। करीब 84 फीसदी लोगों ने दोबारा सिलिंडर रिफिल नहीं कराए।
इन घरों की औरतें आज भी लकड़ी के चूल्हे फूंककर रोटी पकाती हैं। बदले में चूल्हे का धुआं उनके फेफड़ों को हर रोज प्रभावित करता है।
जिले में दो लाख 36 हजार गरीबों को योजना के तहत रसोई गैस, चूल्हा और सिलिंडर दिए गए हैं। पिछले साल कोरोना काल में जब गैस रिफिल फ्री हुई तो शत प्रतिशत उपभोक्ताओं ने सिलिंडर भरवाए। उसके बाद सब्सिडी बंद हुई और रसोई गैस के दाम बढ़े तो लोगों ने सिलिंडर को किनारे रख दिया।
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इस साल जून की बात करें तो सिर्फ 38 हजार 900 उपभोक्ताओं ने सिलिंडर भरवाने के लिए बुकिंग कराई। यानी सरकार की धुआंमुक्त योजना को रसोई गैस के बढ़ते दामों ने पलीता लगा दिया। ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश घरों में सिलिंडर से खाना पकाना बंद हो चुका है। गृहिणियां सुबह-शाम मिट्टी से बने चूल्हे में खाना पकाती हैं और खेत-खलिहान, जंगल से लकड़ियां एकत्र करती हैं। मवेशियों के गोबर से बने उपलों को चूल्हे में उपयोग करती हैं।
तहसील का नाम लाभार्थियों की संख्या रिफिल कराने की संख्या
सदर 81500 15700
खागा 75000 9000
बिंदकी 80500 14200
कुल 236000 38900
जनपद में उज्ज्वला योजना के दो लाख 36 हजार लाभार्थी हैं। अब कितने गैस रिफिल करा रहे हैं, इसका विवरण विभाग के पास नहीं है। संबंधित गैस एजेंसी के पास यह जानकारी रहती है। -अंजनी कुमार सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी
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