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उज्ज्वला योजना: आंकड़े झूठे और दावा किताबी ...

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बरौंहा गांव में सिलेंडर कोने में रखकर लकड़ी से चूल्हे पर खाना पकाती महिला। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। अदम गोंडवी की पंक्तियां हैं, तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है। सरकार की उज्ज्वला योजना की सफलता पर ये पंक्तियां एकदम सटीक बैठ रही हैं।
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हर सरकारी बैठक में गांव की गरीब महिलाओं को सशक्त बनाने के नाम पर जिस उज्ज्वला योजना के आंकड़े बढ़ चढ़ कर बताए जाते हैं, उसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही हैं। आलम ये है कि बड़े पैमाने पर जिन घरों में एक बार गैस सिलिंडर पहुंच गया है।
वहां दोबारा उसे रिफिल कराने की नौबत ही नहीं आई। घरों में सिलिंडर तो पहुंच गए हैं लेकिन औरतें आज भी रसोई में अपने हिस्से की सांसे चूल्हे में फूंककर रोटी पकाती हैं और बदले में चूल्हे का धुआं उनके फेफड़ों को हर रोज बंद करता है।
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जिले में दो लाख 36 हजार गरीबों को उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस चूल्हा व सिलिंडर दिए गए हैं।
इन कनेक्शनों में सरकारी शर्त ये है कि गैस चूल्हा और सिलिंडर शुरू में तो निशुल्क दिए जाते हैं लेकिन जब तक इनकी कीमत अदा नहीं हो जाती, तब तक उज्ज्वला के सिलिंडरों में गैस सब्सिडी नहीं मिलती।
लिहाजा शुरुआती तकरीबन 14 सिलिंडरों में उज्ज्वला कनेक्शन धारकों को गैस सब्सिडी नहीं दी जाती।
कोरोना काल में जब फ्री रसोई गैस रिफिल की गई तो शत प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बुकिंग कराई। उसके बाद सब्सिडी बंद हुई और रसोई गैस के दाम बढ़े तो लोगों ने सिलिंडर को किनारे रख दिया।
फरवरी महीने की बात करें, तो सिर्फ 53 हजार 500 उपभोक्ताओं ने ही गैस रिफिल कराने के लिए बुकिंग कराई है।
सरकार की धुआं मुक्त योजना को रसोई गैस के बढ़ते दामों ने पलीता लगा दिया है। उज्ज्वला योजना से जुड़े 78 फीसदी परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने गैस सिलिंडर को किनारे में रखकर लकड़ी से चूल्हे पर खाना पकाना शुरू करा दिया है।
ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांश घरों में सिलिंडर बंद हो चुके हैं, गृहणियां सुबह-शाम मिट्टी से बने देसी चूल्हों में खाना पका रही हैं।
खेत-खलिहान, जंगल से लकड़ियां एकत्र करने और मवेशियों के गोबर के उपलों को बनाने का काम शुरू कर दिया है।
चूल्हों के पास बैठकर खाना पकाने वाली महिलाओं के लिए पहले की तरह ही सांसों में धुआं, आंखों में जलन और आंसू की बेबसी लौट आई है।
तीन महीने मिला था फ्री सिलिंडर
कोरोना काल में उज्ज्वला योजना से जुड़े लाभार्थियों को अप्रैल 2020 से तीन महीने तक फ्री गैस सिलिंडर की बुकिंग की गई। इसके बाद दिसंबर 2020 से गैस के दामों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी की गई। दिसंबर से मार्च 2021 तक 225 रुपये रसोई गैस के दाम बढ़ गए हैं। जिससे गरीब परिवार गैस सिलिंडर घर के कोने में रखने के लिए मजबूर हो गए।
तहसीलवार लाभार्थियों की सूची....
तहसील का नाम- लाभार्थियों की संख्या- रिफिल कराने वालों की संख्या
सदर-- 81500-- 20500
खागा-- 75000-- 15000
बिंदकी-- 80500-- 18000
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कुल - 2,36,000 - 52,500
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कृष्णा नगर बहुआ की सन्नो बेगम चूल्हे में खाना पका रही हैं। गैस सिलिंडर एक किनारे में रख दिए हैं। इनका कहना है कि गैस के दाम हर महीना बढ़ रहे हैं। सवा-डेढ़ महीने में सिलिंडर भराना पड़ता है। मजदूरी से जो कमाते हैं, वह घरेलू खर्च में खत्म हो जाता है। इसलिए अब सिलिंडर भरवाना बंद कर दिया है।
बहुआ की गृहणी साधना दुबे ने कहा कि सिलिंडर को रिफिल करा करके रख लिया हैं, लेकिन खाना मिट्टी के चूल्हे में पकाते हैं। गैस के दाम इतने बढ़ गए हैं कि लकड़ी और गोबर उपलों का फिर से उपयोग करने लगे हैं। इमरजेंसी के लिए सिलिंडर भरा हुआ रखा है।
सिलिंडर रिफिल कराना कनेक्शन धारक का निजी विषय है। पात्रता के आधार पर सभी को उज्ज्वला योजना से लाभांवित किया गया है। जो लोग रह गए हैं, उनके नए आवेदन भी लिए जा रहे हैं।
गाइडलाइन के अनुसार हमारा प्रयास है कि मानक में आने वाले हर व्यक्ति को कनेक्शन मिले, रही बात सब्सिडी की तो जो लाभार्थी चौदह बार सिलिंडर रिफिल करा चुके हैं, उनके खातों में सब्सिडी नियमित रूप से जाती है। - अंजनी सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी

गृहणी सन्नो बेगम। संवाद- फोटो : FATEHPUR

साधना दुबे। संवाद- फोटो : FATEHPUR

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