बिंदकी कस्बे के चर्चित तिहरे हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर आठ नित्यानंद श्रीनेत ने जुर्म साबित होने पर पांच अभियुक्तों को उम्र कैद की सजा सुनाई हैे। इनमें एक अभियुक्त की मुकदमे की सुनवाई के दौरान 2010 में मौत हो चुकी है। अदालत ने पांचों अभियुक्तों पर 37-37 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार बिंदकी कस्बे के सब्जी बाजार में 26 जुलाई 2009 को सुबह सात बजे मिर्च के पैसे के लेन देन में लल्लू बोरा व मुन्नवर के बीच कहासुनी हो गई । शाम को लगभग साढ़े आठ बजे वादी एकराम, रुखसाना, खुशबू, शहरूख, राशिद, अनीस, मुन्नवर, रईस और एहसान पर घर जाते समय जहानपुर स्थित बड़ा कुआं के पास हमला किया।
हमलावरों लल्लू बोरा, हफीज, चांदपुर, नूर, हफीज, लाला व राशिद ने लाइसेंसी बंदूक व तमंचों से फायरिंग करने के साथ पथराव भी किया। इससे मोहम्मद रईस, शब्बीर, एहसान, अब्दुल रहमान, अनीस उर्फ देवा व मुन्नवर गंभीर रूप से घायल हो गए।
घायलों को स्थानीय अस्पताल से गंभीर हालत में कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां इलाज के दौरान घायल मोहम्मद रईस, शब्बीर और एहसान की मृत्यु हो गई थी। घटना की एफआईआर मृतक के भाई मोहम्मद इकराम ने बिंदकी में आरोपियों के खिलाफ दर्ज कराई थी।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपियों पर हत्या, हत्या का प्रयास और दहशत पैदा करने के आरोप लगाए गए थे। अभियोजन पक्ष ने घायलों सहित 13 गवाह पेश किए थे।
बचाव पक्ष ने तीन गवाह पेश किए। आरोपी हफीज की न्यायिक अभिरक्षा में जिला चिकित्सालय में 21 अगस्त 2010 को हो गई थी। कोर्ट ने बुधवार को मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए पांचों अभियुक्तो लल्लू बोरा, उसके तीन पुत्रों चांद, नूर, लाला व एक अन्य राशिद को उम्र कैद की सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता जगदीश प्रसाद गुप्ता और सरकारी अधिवक्ता अनिल दुबे ने बहस की।