औंग/फतेहपुर। आशापुर गांव में सोमवार को तीन और बंदरों की मौत हो गई। अब तक करीब 15 बंदरों की जान जा चुकी है। इसके बाद भी वन विभाग के अफसर मौके पर नहीं पहुंचे हैं। ग्रामीणों ने तीनों बंदरों का अंतिम संस्कार कर दिया है।
ग्रामीण शैलेंद्र अवस्थी ने बताया कि बंदरों के मुंह से खून और झाग निकलता है। इसी बीच उनका आधा शरीर नीला पड़ जाता है और फिर बंदर की मौत हो जाती है। ग्रामीणों के अनुसार यह किसी गंभीर संक्रमण या जहर का असर हो सकता है। जांच न होने से अभी तक मामला स्पष्ट नहीं हो सका है। वन रेंजर रविंद्र बिष्ट ने कहा कि इस मामले से वन विभाग का कोई लेना-देना नहीं है फिर भी वह प्रकरण को दिखवाएंगे।
डॉक्टर इंतजार करते रहे, वन विभाग की टीम नहीं आई
गोपालगंज पशु चिकित्सालय के डॉ. संतोष शर्मा ने बताया कि वह वन विभाग की टीम के आने का इंतजार करते रहे। सोमवार को तीन बंदरों की मौत हुई थी। यदि वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचती तो शवों का पोस्टमार्टम कर मौत के कारणों का पता लगाया जा सकता था लेकिन टीम के न आने के कारण वह आशापुर गांव नहीं जा सके।