शहर में सरकारी जमीन पर कब्जे की होड़ है। कहीं भूमाफिया हावी हैं तो कहीं घर-दुकान के सामने जमीन कब्जाने वाले। हालात यह है कि नगर पालिका परिषद के 84 तालाबों में अधिकांश का अस्तित्व खत्म हो चुका है। इक्का दुक्का बचे तालाब भी अतिक्रमण की गिरफ्त में समाते जा रहे हैं। यही कारण है कि बरसात में शहर जलभराव की समस्या के साथ पेयजल की समस्या से जूझ रहा है।
नगर पालिका परिषद का 1962 में गठन किया गया था। इस दौरान शहर के आसपास के 49 गांव नगर पालिका क्षेत्र में शामिल किए गए थे। इस दौरान नगर पालिका क्षेत्र में 84 तालाब आए थे, जिनका क्षेत्रफल 872 बीघे था। इनमें आधा सैकड़ा तालाब आबादी के मध्य स्थित थे। वर्तमान समय में गंगानगर, खलीलनगर, आबूनगर, गढ़ीवा, हरिहरगंज, झाऊपुर, नाथपुरी कालोनी के तालाबों का या तो अस्तित्व खत्म हो चुका है या फिर खत्म होने वाला है। नगर पालिका के अभिलेखों में ज्यादातर तालाबों का भूमिधरी दर्ज कर यह खेल किया गया है। इतना ही नहीं विस्तार के समय 11 सौ बीघे सरकारी जमीन दर्ज थी, लेकिन मौके पर इन जमीनों पर इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। डेढ दशक पहले तक बक्सपुर में उप विद्युत केंद्र राधानगर के पीछे और सामने सड़क के पार करीब 32 बीघे जमीन थी, जिसमें वर्तमान समय में या तो लोग खेती कर रहे हैं या फिर पक्के भवन बन चुके हैं। नगर पालिका परिषद का ध्यान इन जमीनों की ओर नहीं है। पूर्व सभासद सत्यभगवान गुप्ता का कहना है कि नगर पालिका परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण तालाब और सरकारी जमीनों पर माफियाओं ने कब्जा किया है। इसकी शिकायत पीएम मोदी से मिलकर की जाएगी। उन्होंने नगर पालिका परिषद की सफाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए।
फतेहपुर। विधान सभा चुनाव के बाद सरकार बदलते ही डीएम सेल्वा कुमारी जे. ने भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। राजस्व कर्मियों को ग्राम समाज की जमीन से अतिक्रमण हटवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने लेखपालों से ऐसे भू-माफियों की सूची मांगी है। एसडीएम व तहसीलदार से अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।