वित्तीय वर्ष 2015-16 के आखिरी दिन सरकारी विभागों में पेमेंट को लेकर जद्दोजहद दिखाई दी। ट्रेजरी विभाग में गुरुवार को बिल लगाने की होड़ देखते बनी। करीब दो हजार से ज्यादा बिल लगाए गए। 90 फीसदी भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। पंचायत कार्यालय व स्वास्थ्य विभाग का पेमेंट ही बचा है। शस्त्र विभाग में यूनिक आईडेंटीफिकेशन नंबर शामिल करने को लाइसेंसधारियों का रेला नजर आया। लंबी लाइन में लगे लाइसेंसधारकों के चेहरे में प्रक्रिया पूरी न कर पाने पर शस्त्र के हाथ से जाने का खतरा साफ देखने को मिला। रसोई गैस की सब्सिडी हासिल करने के लिए एक अप्रैल से पहले आधार कार्ड लिंकअप करने की अनिवार्यता को लेकर भी ऐसा ही हुआ। एलपीजी धारकों की दिनभर गैस एजेंसियों में दमदम बनी रही। इंडियन आयल के 15 मार्च के आंकड़ों के लिहाज से तमाम एलपीजी धारक सब्सिडी से बाहर हो सकते हैं। पेश है-एक रिपोर्ट।
31 मार्च को कोषागार का दमदम दिखा। सरकारी विभागों मेें इस दिन बिल लगाने की होड़ मच गई। करीब दो हजार के आसपास बिल प्रेषित किए गए। जिसमें विभागीय स्तर से करीब 70 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया।
हालात यह रहे कि यह दफ्तर देरशाम तक खोल रखा गया ताकि भुगतान की प्रक्रिया निपटाई जा सके। इसके बावजूद 30 करोड़ के बिल से स्थिति साफ नहीं हो सकी। रिजर्व बैंक डिपॉजिट के तहत साल के आखिरी महीने मेें 300 करोड़ के बिल भेजे जाने हैं।
23 मार्च से इस काम में तेजी आई तो आखिरी दिन तक कोषागार में सरकारी विभागों के मुलाजिमों की आमद ने खत्म होने का नाम नहीं लिया। 29 मार्च से इसमें और तेजी आई। आखिरी दिन पुलिस, डीआडीए, डीपीआरओ, बेसिक शिक्षा विभाग, ब्लाक, जिला विकास विभाग, कलेक्ट्रेट, सिंचाई, पीडब्लूडी विभाग से ही अकेले 1200 बिल भेजे गए।
कमोवेश यही स्थिति स्वास्थ्य विभाग, आईआईटी, कृषि, उद्यान, पालीटेक्निक, चुनाव विभाग की रही। पीएसी ने 99 लाख के विद्युत बिल लगाए। इसी प्रकार से विद्युत के ही पुलिस विभाग से 10 लाख और सिंचाई विभाग की ओर से 20 लाख के बिल लगाए गए।
वरिष्ठ कोषाधिकारी साहित्य कुमार ने बताया कि 90 फीसदी से ज्यादा का भुगतान पूरा हो चुका है। प्रक्रिया जारी है। रात 10 बजे तक काम चल सकता है। जिन विभागों के बिल शेष हैं उनमें पंचायत व स्वास्थ्य जैसे विभाग शामिल हैं।