बिंदकी सहित तहसील क्षेत्र के कस्बों व ग्रामीण क्षेत्र में पॉलीथिन का चलन
नहीं रुका। कोर्ट व सरकार के आदेशों को दरकिनार कर दिया गया है। प्रशासन का
बेखबर होना चिंता का विषय है।
प्रदेश सरकार के निर्णय का स्थानीय
स्तर पर कोई असर नहीं दिख रहा है। कहीं भी पॉलीथिन पर रोक लगाने के लिए
छापेमारी जैसी कार्रवाई नहीं की गई।
न ही दुकानदारों को मुनादी अथवा एनाउंस
कराकर पॉलीथिन में सामान देने से रोका गया। जागरूक दुकानदारों को तो
समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी है, लेकिन अधिकांश दुकानदार शासन के
निर्णय से अनजान हैं।
नगर बिंदकी सहित कस्बा जहानाबाद, अमौली, जाफरगंज,
जोनिहां, बकेवर, चौडगरा, औंग, मुरादीपुर और ग्रामीण क्षेत्रों में पॉलीथिन
का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है।
पन्नी के थोक विक्रेता कुलदीप, फाटक बाजार
के मुनऊ सिंह , मुकुंदी गुप्ता आदि ने बताया कि कानपुर से पॉलीथिन आना जब
बंद हो जाएगी तो जिले में भी अपने-आप रोक लग जाएगी।
एसडीएम बिंदकी जेएन सचान ने कहा कि प्रशासनिक
कार्यों में व्यस्तता के चलते छापेमारी नहीं हो पाई है। पॉलीथिन में पूरी
तरह से रोक लगाने के लिए पुलिस व राजस्व अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर
प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
रामेश्वर दयाल उर्फ दयालू पूर्व जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी ने कहा कि पॉलीथिन
और प्लास्टिक, पर्यावरण व लोगों के लिए बेहद हानिकारक है। सरकार के निर्णय
का प्रशासनिक अधिकारी पालन नहीं करा रहे हैं। यह मामला अत्यंत गंभीर है।
शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी।
समाजसेवी बिंदकी सफी अहमद ने कहा कि बाजार में पॉलीथिन की उपलब्धता होने के बाद भी मैं घर से थैला लेकर निकलता रहा हूं। इस पर रोक लगाए जाने से मैं बेहद खुश हूं।
सुशील उर्फ कल्लू लोहिया अध्यक्ष उद्योग व्यापार मंडल बिंदकी ने कहा कि प्लास्टिक जब बाजार में नहीं मिलेगी तो फिर हर व्यक्ति के हाथों में झोला
दिखेगा। आसानी से पॉलीथिन में सामान मिल जाता है इसलिए घर से थैला लेकर
निकलने की आदत छूट चुकी है।
राजेश उर्फ बिल्लू बजाज ने कहा कि आदत में बदलाव से ही पॉलीथिन की निर्भरता का त्याग हो पाएगा। प्रशासन को चाहिए कि पॉलीथिन पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए।