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Fatehpur News: पिकनिक से शुरू परिवार का काल, तीन दिन में चार की मौत

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फतेहपुर। नोएडा में पत्नी चारू के साथ प्राइवेट कंपनी में कार्यरत आदित्य का हंसता खेलता परिवार कुछ दिनों में काल के गाल में समा गया। इन हालातों में आदित्य के क्रियाकर्म की घड़ी भी पीछे रह गई। परिवार में चर्चा रही कि आदित्य किस गलत समय पर पिकनिक पर निकले थे कि आज उनके पीछे रोने वाले भी नहीं रहे।
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झांसी के मूल निवासी आदित्य नोएडा की एक कंपनी में डिप्टी मैनेजर बताए जाते हैं। उनके साथ पत्नी चारू भी कंपनी में काम करती थीं। शादी हुए कुछ ही समय बीता था। उन्हें कोई बच्चा नहीं था। वह 12 अप्रैल को मध्य प्रदेश के उज्जैन-ओंकारेश्वर दर्शन के लिए गए थे। ओंकारेश्वर ब्रह्मपुत्र घाट पर 12 अप्रैल की शाम डूबने से मौत हो गई थी। 16 अप्रैल को उनका शव नदी में उतराता मिला था। मौत की पुष्टि से परिवार सदमे में था।
परिवार ने 17 अप्रैल को आदित्य का अंतिम संस्कार किया। इसके बाद 18 अप्रैल की रात अस्थियां लेकर झांसी से प्रयागराज के लिए निकले थे। आदित्य का भतीजे काश्विक से गहरा लगाव था। महज 12 साल के काश्विक ने चाचा के अंतिम संस्कार की क्रिया साधना का फैसला लिया था। चिता लगने के बाद ही दाग लेकर चाचा के अंतिम संस्कार की कियाएं शुरू की थीं कि दूसरा हादसा परिवार पर कहर बनकर टूट पड़ा। इन हालातों में आदित्य के अंतिम संस्कार की क्रियाएं अधूरी रह गईं।
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कार में पीछे के एयरबैग ही खुले, इसलिए पीछे बैठने वाले बचे
फतेहपुर। हादसे में गलती भले किसी की हो, लेकिन सभी की जुबां पर कार तेज रफ्तार में होने की बात आ रही है। इसी वजह से सबसे पीछे बैठे कार सवार तक चोटिल हो गए। हादसा स्थल पर कार के चारों एयरबैग खुले थे। ठीहों के टूटने से इंजन डैशबोर्ड से टकरा गया। डैशबाेर्ड में चालक और रामकुमार की दबने से मौत हो गई।
उनके पीछे रामकुमार की पत्नी कमलेश और दामाद पराग बैठे थे। जोरदार धक्के से आगे वाली सीटें टूट गईं। उन सीटों में दबने से दोनों की मौत हो गई। तीसरी सबसे पीछे की सीट पर चारू और काश्विक थे। वह दोनों नींद में थे। बीच की सीट अपनी जगह ही रही। इसी वजह से पीछे बैठी चारू और काश्विक की जान बच सकी। हाईवे पर कार के परखच्चों को पुलिस एक-एक कर बटोरती नजर आई। हादसास्थल देखकर सभी बोले कि कार बहुत ही तेज थी। अगर कार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर होती तो शायद दुर्घटना इतनी भीषण न होती।


हादसे से दहशत में दिखी चारू ने मांगा मोबाइल
जिला अस्पताल में भर्ती चारू अभी भी खौफ में है। जिला अस्पताल कर्मियों ने उसे हादसे में परिवार के खोने की जानकारी नहीं दी। होश आने पर वह परिवार के संपर्क के लिए अपना मोबाइल मांगती दिखी। वह बोली पापा-मम्मी कहां हैं। वह लोग कैसे हैं। उसे मिलना है। कोई मोबाइल दे दो वह उनसे बात करना चाहती है। पति की मौत के सदमे से उबर न पाने वाली चारू को किसी में हिम्मत नहीं थी कि कोई उसे मां-बाप जैसे सास-ससुर की मौत की खबर दे सके।

करीब छह घंटे कार चला चुका था चालक
झांसी से रात करीब दस बजे के आसपास परिवार के लोग सारी तैयारियां करने के बाद घर के बाहर आए थे। उन्हें झांसी शहर से निकलते हुए करीब 11 बजे गए। झांसी से कानपुर तक करीब 250 से 300 किलोमीटर के बीच की दूरी में काफी समय लगता है। चालक शिवम भी गमगीन परिवार के बीच था। कहीं न कहीं वह भी रास्ते में रुकने व अन्य इच्छाओं जैसे रास्ते में नींद न आने के लिए गाना बजाने से गुरेज करता रहा होगा। हादसा स्थल से उसे करीब 90 से 100 किलोमीटर की दूरी तय करना बाकी रह गया था।
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