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डेढ़ किमी दूर यमुना नदी के पानी से प्यास बुझा रहे ग्रामीण

Sun, 08 Apr 2018 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फतेहपुर
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यमुना नदी से पानी भर कर लाती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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यमुना तटवर्ती गांव के लोग पानी के संकट से जूझ रहे हैं। जलस्तर घटने से इंडिया मार्का व निजी हैंडपंप से पानी नहीं निकल रहा है। प्यास बुझाने के लिए यमुना नदी ही सहारा है। डेढ़ किमी दूर सू महिलाएं व बच्चे डिब्बा और घड़े में यमुना नदी से पानी भर कर लाने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था दुरुस्त कराने में प्रशासन नाकाम है।
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यमुना तिरहार पानी की किल्लत से जूझ रहा है। कोर्रा कनक ग्राम पंचायत के 56 मजरों में करीब 20 मजरे यमुना नदी के तट पर बसे हैं। इसमें हड़ाही का डेरा और मैनाही का डेरा सबसे अधिक पानी की समस्या से जूझ रहा है। दोनों डेरों की आबादी लगभग तीन हजार है। यहां के लोग यमुना के पानी से गुजर बसर करते हैं। मवेशियों को सुबह, शाम पानी पिलाने के लिए यमुना नदी ले जाते हैं।

हड़ाही का डेरा के ग्रामीण बबलू सिंह ने बताया कि एक महीने से इंडिया मार्का हैंडपंप पानी नहीं दे रहा है। नहाने, खाने के लिए यमुना नदी से ही पानी भर कर लाना पड़ता है। ग्रामीण अमरजीत सिंह ने बताया कि गांव की महिलाएं और बच्चे यमुना नदी से पानी भर कर लाते हैं। उससे खाना बनाया जाता है।
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ग्रामीण अतुल मिश्रा ने बताया कि बारिश के समय यमुना नदी के बाढ़ से लोगों को जूझना पड़ता है। गर्मी में पानी की समस्या नासूर बन जाती है। प्रशासन यमुना तटवर्ती गांव की समस्याओं को नजर अंदाज किए हैं। अधिकारियों की अनदेखी से लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। इसी प्रकार यमुना तिरहार के पथरी, रायपुर भसरौल, गढ़ीवा, मझगवां गांव में पानी का संकट बना हुआ है।
डीपीआरओ अजय आनंद सरोज ने बताया कि खराब हैंडपंपों की मरम्मत कराने और बोरिंग फेल हैंडपंपों का रिबोर दूसरे स्थान में कराया जा रहा है। जिन गांवों में पंचायत राज विभाग से रिबोर नहीं हो सकता है, उनकी सूची जल निगम को दी गई है।
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