निर्माण के बाद से शोपीस बनी थरिंयांव की पानी टंकी
थरियांव कस्बा में पानी टंकी निर्माण के चार साल बाद भी कस्बा में जलापूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। पहले की तरह लोगों को हैंडपंप से पानी भर कर दिनचर्या की शुरुआत करनी पड़ती है। गर्मी के आते ही कस्बा में पेयजल की समस्या बढ़ जाती है। पानी का पाउच खरीद कर राहगीरों को प्यास बुझानी पड़ती है। कस्बावासियों व व्यापारियों की मांग के बाद भी प्रशासन टंकी से जलापूर्ति बहाल नहीं करा रहा है।
वर्ष 2010-11 में थरियांव जल निगम से दो नलकूप व दो ओवर हेड टैंक स्वीकृत हुए थे, जिसमें पानी की टंकी प्रथम का निर्माण कार्यदायी संस्था ने पूरा करा दिया है। थरियांव के अलावा कई मजराें में जलापूर्ति भी शुरू है। दूसरी पानी की टंकी का निर्माण कस्तूरबा गांधी विद्यालय के बगल में हुआ है।
कार्यदायी संस्था ने दो साल पहले जैसे तैसे नलकूप व ओवर हेडटैंक का निर्माण करा दिया है, लेकिन अभी समुचित ढंग से पाइप लाइन नहीं डाली गई है। इस नलकूप से रामपुर थरियांव के मजरा सीतापुर, करनपुर, हनुमानपुर व कस्बे में पाइप लाइन डालकर जलापूर्ति होनी है।
विभागीय अधिकारी व कार्यदायी संस्था की लापरवाही से अभी तक कस्बा तक ही पाइप लाइन पड़ सके हैं। उसमें भी जलापूर्ति नहीं हो रही है। कस्बा के सगीर अहमद, लवकुश मोदनवाल, मलखान सिंह ने बताया कि पानी टंकी निर्माण के बाद ठूंठ बनी हुई है। लोगों को पहले की तरह हैंडपंपों से पानी भर कर घर लाना पड़ता है।
नलकूप से कस्बा तिराहे तक डाली गई पाइप लाइन भी जर्जर है। विभागीय अधिकारी व ठेकेदार ने एक-दो बार टेस्टिंग की है, जिसमें करीब पांच सौ मीटर में ही लीकेज से पूरा पानी बाहर निकल गया। अधिशासी अभियंता पीके यादव ने बताया कि थरियांव कस्बा की पानी टंकी व पाइप लाइन का निरीक्षण कराया जाएगा। नलकूप से जलापूूर्ति जल्द बहाल कर कस्बावासियों को पेयजल के संकट से निजात दिलाया जाएगा।