फतेहपुर। बांदा-सागर रोड पर शहर के नउवाबाग से राधानगर तक की खस्ताहाल सड़क लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। धुल के गुबार से लोगों का दम फूलने लगा है। इस मार्ग पर गुजरने वाला हर शख्स परेशान है। चार पहिया वाहन चालक तो शीशा बंद कर जैसे-तैसे निकल रहे हैं लेकिन दोपहिया वाहन से चलने वालों के लिए यह रास्ता मुसीबत भरा हो गया है। जिले में जहां आम सड़कों पर धूल व प्रदूषण की मात्रा 45 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब है, वहीं इस मार्ग पर यह सौ से ऊपर पहुंच गया है।
शहर के नउवाबाग से राधानगर तक यह बांदा-सागर मार्ग कई जगह खस्ताहाल हो गया है। इस मार्ग से कई विद्यालयों के छात्र-छात्राएं भी साइकिल, बाइक व बस से आते जाते है। मौरंग, गिट्टी से लदे ट्रकों के आवागमन से दिन भर धूल के गुबार उड़ रहे हैं। इससे जयराम नगर, चित्रांश नगर, नई तहसील, राधा नगर समेत कई मोहल्ले धूल से पटे पड़े हैं। विभाग की ओर से दर्ज आंकड़ों को केवल दर्ज किया जाता है। प्रदूषण रोकने को लेकर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होता है। अफसर वायु प्रदूषण के लिए कहते हैं कि शहर में खुदाई, निर्माण और धूलयुक्त सड़क में वाहनों का आवागमन सबसे बड़ी वजह है। जो प्रदूषण फैला रहे हैं। मौसम विशेषज्ञ सचिन कुमार शुक्ला के अनुसार जिले में धूल के छोटे कणों की मात्रा 45 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब है लेकिन शहर के नउवाबाग-जयमराम नगर की सड़क में माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब काफी बढ़ा हुआ है। यहां पर 100 से 110 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब के आसपास है। जो सामान्य स्थिति से काफी अधिक है।
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आमने-सामने
धूल से बचने के लिए जब भी घर से निकले तो मास्क व कपड़े से चेहरे को ढंक लें। माइक्रोग्राम मीटर क्यूब धूल अधिक उड़ने से बढ़ता है। इसके बढ़ने से दमा, श्वांस और खांसी की बीमारी फैलने लगती है।
- सचिन कुमार शुक्ला (मौसम विशेषज्ञ )
नया बाईपास बंद होने से बांदा-सागर रोड पर लोड ज्यादा हो गया है। ओवरलोड वाहनों के चलते सड़क खस्ताहाल हो रही हैं। गिट्टियां गिरवा दी गई हैं। जल्द ही पहले पैचिंग से इसे दुरुस्त किया जाएगा। - मुकेश कुमार सोनकर (अधिशासी अभियंता, पीडब्लूडी )