लाला बाजार में चुप ताजिया निकालते अकीदतमंद
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करबला में शहीदों की याद में रविवार को चुप ताजिये का जुलूस निकाला गया। इस दौरान अजादारों ने नौहाख्वानी कर सीनाजनी की। सभी अजादार काले लिबास में थे। जुलूस से पहले मजलिस की गई। इसमें कर्बला में इमाम हुसैन समेत 72 शहीदों की शान में कसीदे पढ़े गए। मौलाना ने कहा कि यजीद जैसे बदकिरदार की हुकूमत को इमाम हुसैन ने तस्लीम नहीं किया था। इसके लिए उन्होंने अपनी जान देकर नाना के दीन को बचा लिया।
इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों पर यहीदी सेना के टूटे कहर की याद में निकलने वाला यह चुप ताजिया का जुलूस मोहल्ला कजियाना की चूड़ी वाली गली से सुबह साढ़े आठ बजे निकाला गया। कदीमी रास्तोें से जुलूस गुजरा। मुस्लिम चौक, मुस्लिम इंटर कालेज के रास्तों से होता चुप ताजिया दोपहर बाद खलील नगर स्थित करबला पहुंचा। मुस्लिम इंटर कालेज के पास अंजुमन-ए-जाफरिया व अंजुमन-ए-अब्बासिया ने नौहाख्वानी व सीनाजनी पेश किया। जाकिरे अहले बैन जनाब यावर मेंहदी ने यजीदी जुल्म की दास्ता बयां करते हुए इस्लाम को अमन और आतिशी का मजहब करार दिया। उन्होंने कहा कि बेगुनाह का खून बहाकर खुद को मुसलमान कहने वाले लोगों का इस्लाम से किसी प्रकार का वास्ता नहीं है। मौलाना फिरोज हैदर साहब कानपुरी ने भी आतंकवाद पर प्रहार किया। करबला में ढाए गए जुल्म को बयां करते हुए कहा कि हजरत हुसैन वारिसे रसूल थे, इसलिए उन्होंने अपने नाना के दीन को बचाने के नाम पर अपना भरा घर लुटा दिया। हक और अहिंसा की ऐसी मिसाल दुनिया कभी न ला सकेगी।
इस मौके पर मौलाना हैदर अब्बास प्रतापगढ़ी, मौलाना एजाज अब्बास, जुहैर करनैन मंझनपुरी, सैयद कसीम अब्बास नकवी, कलीम अब्बास, अशरफ अली, शकील मेंहदी, फय्याज अकबर, मोहम्मद अकबर, नसीर हुसैन भी मौजूद रहे।