जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की खाली कुर्सी।
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फतेहपुर। जिला मुख्यालय के चार दफ्तरों में अफसर नहीं हैं। इससे विभाग की योजनाओं पर अमल भी नहीं हो रहा है। जिन अफसरों को उनका अतिरिक्त प्रभार दिया गया है वह भी कार्य अधिक होने की वजह से ठीक से ध्यान नहीं दे रहे हैं।
प्रोबेशन अधिकारी नीता अहिरवार का 31 दिसंबर 2016 को तबादला हो गया था। यह दफ्तर एक सप्ताह से अधिकारी विहीन है। सात जनवरी को तत्कालीन जिला समाज कल्याण
अधिकारी को प्रोबेशन अफसर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। 10 जुलाई को जिला समाज कल्याण अधिकारी का प्रमोशन हो गया। इसी दिन नए जिला समाज कल्याण अधिकारी आरपी यादव ने चार्ज संभाल लिया। 10 दिन जिले को सेवा देने के बाद आरपी यादव ट्रांसफर करा कुशीनगर चले गए। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सैय्यद नजाबत अली का 31 जनवरी को तबादला हुआ था। इससे यह विभाग पूरे एक महीने अफसर विहीन है। दो फरवरी को जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी एलके मिश्रा को अल्पसंख्यक विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इनका भी मार्च में तबादला हो गया था। ऐसे में इस विभाग का वैकल्पिक अफसर जिला विकलांग जनकल्याण अधिकारी डॉ. प्रीति लता को बनाया गया था। तबादला होने पर बुधवार को प्रीति लता बांदा चली गईं। ऐसे में अल्पसंख्यक विभाग फिर से अफसर विहीन हो गया है। हालांकि विकलांग जनकल्याण विभाग का जिम्मा जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अफसर मुदित कुमार को जरूर दे दिया गया है। अफसर विहीन विभाग होने से इन विभागों के कामकाज पर असर पड़ रहा है। जिन अफसरों को अतिरिक्त चार्ज दिया गया है उनके सामने मजबूरी है कि वह अपने विभाग का काम देखें या फिर अतिरिक्त जिम्मेदारी का। डीएम मदन पाल आर्य का कहना है कि विभागीय गतिविधियां बहाल रखने के हर संभव प्रयास हो रहे हैं। तबादला एक सतत प्रक्रिया है, लेकिन जो अफसर बिना बताए जिला छोड़ रहे हैं, उनके बारे में सोचना पड़ेगा। सोशल अपलिफ्ट सोसाइटी के महासचिव वासिफ हुसैन ने कहा कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के न होने से मदरसा आधुनिकीकरण में दिक्कत आ रही है।
इन विभागों में नहीं हैं अधिकारी
जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और जिला विकलांग जनकल्याण अधिकारी।